हरिद्वार जनपद के लंढौरा स्थित **चमन लाल महाविद्यालय (स्वायत्त)** में 17 और 18 मार्च 2026 को सातवां उत्तराखंड राजनीति विज्ञान परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। यह अधिवेशन “अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक परिवर्तन: उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ” विषय पर केंद्रित रहेगा।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा **उत्तराखंड राजनीति विज्ञान परिषद** एवं **भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद** के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम को **भारतीय वैश्विक मामलों की परिषद** नई दिल्ली द्वारा संपोषित किया गया है, जिससे आयोजन की अकादमिक महत्ता और बढ़ गई है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने बताया कि यह अधिवेशन उत्तराखंड के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि साबित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजन उच्च शिक्षा में शोध, संवाद और गंभीर विमर्श की संस्कृति को मजबूत करते हैं। प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पं. रामकुमार शर्मा ने इसे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए समसामयिक राजनीतिक एवं संवैधानिक विषयों पर विचार-विमर्श का प्रभावी मंच बताया।
अधिवेशन के संयोजक डॉ. नीशू कुमार के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 300 से अधिक प्राध्यापक, शोधार्थी, नीति विशेषज्ञ और युवा शोधकर्ता इसमें भाग लेंगे। संगोष्ठी में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में आए संवैधानिक, प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों पर गहन चर्चा होगी।
इस अवसर पर विषय से संबंधित तीन शोध पुस्तकों का विमोचन भी किया जाएगा। साथ ही युवा राजनीति विज्ञान अवार्ड, उत्कृष्ट शोध पत्र और सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और महिला सशक्तिकरण में योगदान देने वाली महिलाओं को भी विशेष सम्मान से नवाजा जाएगा।
यह अधिवेशन समकालीन भारतीय राजनीति और संवैधानिक अध्ययन के क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव छोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।