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रुद्रपुर में श्रमिकों का हुंकार: ‘4 श्रम संहिताएं वापस लो, मजदूर नहीं बनेंगे गुलाम’

रुद्रपुर। उधम सिंह नगर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बुधवार को सैकड़ों श्रमिक, किसान, आशा कार्यकर्ता और भोजनमाता गांधी पार्क में एकत्र हुए और केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग उठाई। सभा के दौरान वक्ताओं ने इन श्रम कोड्स को ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि इससे मजदूरों के अधिकारों पर सीधा प्रहार हो रहा है।

सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि नए श्रम कोड्स के जरिए मजदूरों से 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम लेने का रास्ता तैयार किया गया है। साथ ही स्थायी रोजगार की व्यवस्था को खत्म कर फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट लागू किया गया है, जिससे श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर होगी। वक्ताओं ने यह भी कहा कि नए कानूनों में यूनियन बनाने के अधिकार को सीमित किया गया है, जो श्रमिक हितों के खिलाफ है।

नेताओं का कहना था कि इन श्रम संहिताओं को बिना व्यापक परामर्श और भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित किए लागू किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हित में सार्वजनिक उपक्रमों और सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और स्वदेशी उद्योग प्रभावित होंगे।

सभा के बाद श्रमिकों ने बाजार क्षेत्र में जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम को सीएसटीयू अध्यक्ष मुकुल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के कैलाश भट्ट, भाकपा (माले) के ललित मटियाली, जनकवि बल्ली सिंह चीमा, किसान नेता अवतार सिंह, गंगाधर नौटियाल, रीता कश्यप सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।

इस दौरान विभिन्न यूनियनों और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

 

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