मणिपुर के उखरुल में फिर भड़की हिंसा, नई सरकार के बाद क्यों जल उठा लिटन इलाका?

इंफाल,  मणिपुर में नई सरकार के पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद एक बार फिर अशांति की तस्वीर सामने आई है। उखरुल जिले के लिटन सरेखोंग गांव और आसपास के इलाकों में तड़के हिंसा भड़क उठी, जहां कथित तौर पर हथियारबंद उग्रवादियों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है।

जिला प्रशासन के अनुसार, रविवार शाम से ही लिटन सरेखोंग और पास के सिकिबुंग गांव में हालात तनावपूर्ण बने हुए थे। दो आदिवासी समुदायों के बीच पत्थरबाजी की घटनाओं के बाद स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी।

सूत्रों का कहना है कि तड़के लिटन सरेखोंग में तांगखुल नागा समुदाय के कई घरों को कथित रूप से कुकी उग्रवादियों ने निशाना बनाया। वहीं, जवाबी कार्रवाई में आसपास के इलाकों में कुकी समुदाय के कुछ घरों में भी आग लगाए जाने की खबर है। तांगखुल समुदाय मणिपुर की सबसे बड़ी नागा जनजाति है, जबकि लिटन सरेखोंग कुकी बहुल गांव माना जाता है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एक ग्रामीण बैंक सहित नागा समुदाय के कम से कम नौ घर और कुकी समुदाय के तीन घर आगजनी की चपेट में आए हैं। इस घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें हथियारबंद लोग घरों और वाहनों को आग लगाते और हवा में फायरिंग करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में कथित उग्रवादी छलावरण वाली वर्दी और अत्याधुनिक हथियारों से लैस दिख रहे हैं।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लिटन की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। उखरुल के जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए 08 फरवरी की शाम 7 बजे से अगले आदेश तक कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इस दौरान आम नागरिकों के बाहर निकलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, हालांकि सरकारी अधिकारी और सुरक्षाकर्मी इससे मुक्त होंगे।

अधिकारियों के अनुसार, हिंसा की जड़ शनिवार रात की एक घटना है, जब लिटन गांव में तांगखुल समुदाय के एक व्यक्ति पर कथित तौर पर सात-आठ लोगों ने हमला किया था। इसी घटना के बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।

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