नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और माल ढुलाई की बढ़ी लागत के कारण दिल्ली में सड़क निर्माण और मरम्मत में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन (डामर) के दामों में 40 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सीधा असर राजधानी की सड़कों की मरम्मत पर पड़ा है।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आने वाली करीब 1400 किलोमीटर लंबी सड़कों में से लगभग 961 किलोमीटर सड़कें लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं। बढ़ी हुई लागत के कारण इन सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली सरकार ने केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि (CRIF) के तहत करीब 300 किलोमीटर लंबी 153 सड़कों की मरम्मत की योजना बनाई थी। इसके लिए पिछले वर्ष टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी, लेकिन बिटुमेन की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण कई परियोजनाओं का काम रुक गया।
रिपोर्ट के अनुसार, 283 किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत के लिए जोनवार टेंडर जारी किए गए थे और इनका कार्य मार्च 2027 तक पूरा होना था। हालांकि लागत बढ़ने के कारण निर्माण एजेंसियों के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, लगभग 258 किलोमीटर लंबी सड़कों पर माइक्रो-सर्फेसिंग का कार्य भी प्रस्तावित था, लेकिन महंगे बिटुमेन के चलते यह काम भी शुरू नहीं हो सका है।
दिलचस्प बात यह है कि करीब 20 किलोमीटर लंबी ऐसी सड़कें भी हैं, जिनका मेंटेनेंस पीरियड अभी पांच वर्ष से कम है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। इनकी मरम्मत भी फिलहाल अधर में लटकी हुई है।
वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पासपोर्ट सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है। गर्मियों के दौरान सामान्यतः पासपोर्ट आवेदनों में तेज वृद्धि होती थी, लेकिन इस वर्ष आवेदन संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। झंडेवालान पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, जहां पहले गर्मियों में प्रतिदिन 2500 से 3000 आवेदन आते थे, वहीं अब यह संख्या करीब 2000 तक सीमित रह गई है।