उत्तराखंड में जनता तक पहुंची सरकार: ‘जन-जन के द्वार’ बना सुशासन की मिसाल

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित *“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार”* अभियान आज सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा का एक सशक्त मॉडल बनकर उभर रहा है। यह अभियान सरकार और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करते हुए प्रशासन को सीधे आमजन के द्वार तक ले जाने का कार्य कर रहा है।

इस अभिनव पहल के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में नियमित रूप से जनसेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जहां नागरिकों को प्रशासनिक सेवाएं, शिकायत निवारण, विभिन्न प्रमाण पत्रों की सुविधा और केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे आम जनता को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बड़ी राहत मिली है।

अब तक प्रदेश में कुल **589 जनसेवा कैंप** आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें लाखों लोगों की सहभागिता रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन कैंपों के माध्यम से अब तक **4 लाख 63 हजार से अधिक नागरिकों** ने भाग लिया है। केवल 7 फरवरी 2026 को आयोजित शिविरों में ही **4,237 लोग** शामिल हुए, जो अभियान की लोकप्रियता और विश्वास को दर्शाता है।

अभियान के तहत प्राप्त शिकायतों और प्रार्थना पत्रों के निस्तारण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अब तक कुल **45,601 शिकायतें** प्राप्त हुई हैं, जिनमें से **30,723 मामलों का सफल समाधान** किया जा चुका है। यह सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेह प्रशासन का प्रमाण है।

इसके साथ ही, विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों के लिए **65,528 आवेदन** प्राप्त किए गए हैं, जिससे आमजन को समय और संसाधनों की बचत हुई है। वहीं, **2 लाख 58 हजार से अधिक नागरिकों** को अलग-अलग जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि *“जन-जन के द्वार”* अभियान लोक विश्वास को मजबूत करने, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

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