देहरादून में एलिवेटेड कॉरिडोर पर बढ़ा विरोध, अब मुख्यमंत्री और विधायकों तक पहुंची नागरिकों की आवाज़

देहरादून। रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के खिलाफ नागरिकों का विरोध अब केंद्र से आगे बढ़कर राज्य और जिला स्तर तक औपचारिक रूप से पहुंच गया है। देहरादून और मसूरी के लगभग 150 जागरूक नागरिकों द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भेजे गए संयुक्त पत्र की प्रतियां अब उत्तराखंड सरकार, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।

देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम के अनुसार, यह वही मूल पत्र है जिस पर करीब 150 नागरिकों के हस्ताक्षर हैं। इस पहल का उद्देश्य प्रस्तावित परियोजना से जुड़े गंभीर पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक, सामाजिक और यातायात संबंधी प्रभावों पर राज्य स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

यह नागरिक पत्र उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित किया गया है। इसके साथ ही भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडेय और देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल को भी भेजा गया है।

नागरिकों की यह अपील निर्वाचित जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंचाई गई है। इनमें कैबिनेट मंत्री एवं मसूरी विधायक गणेश जोशी, देहरादून कैंट विधायक सविता कपूर, रायपुर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, राजपुर रोड विधायक खजान दास, धर्मपुर विधायक विनोद चमोली और देहरादून नगर निगम के मेयर सौरभ थपलियाल शामिल हैं। इस प्रकार कुल 11 जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष नागरिकों की सामूहिक आपत्तियां औपचारिक रूप से दर्ज कराई गई हैं।

देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया ज्ञापन नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र को ही राज्य स्तर पर प्रस्तुत किया गया है, ताकि निर्णय-प्रक्रिया केवल दिल्ली तक सीमित न रहे। फ़ोरम के सदस्य पिछले कई महीनों से सार्वजनिक संवाद, विशेषज्ञ बैठकों और वैकल्पिक यातायात समाधान प्रस्तुत करते आ रहे हैं।

नागरिकों का कहना है कि रिस्पना और बिंदाल जैसी मौसमी नदियों के ऊपर प्रस्तावित लगभग 26 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण भूकंपीय रूप से संवेदनशील देहरादून के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने बाढ़ के बढ़ते जोखिम, भूमि धंसाव, भूजल पुनर्भरण में कमी, शहरी तापमान में वृद्धि और वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

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