डीजल के दीपक से मिली आज़ादी: रुद्रपुर विधानसभा में जला आख़िरी चिराग भी बुझा

रुद्रपुर। रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में अंधेरे से उजाले की एक भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। गदरपुर तहसील के **सूरजपुर नंबर-2 गांव** में वर्षों से डीजल से जलने वाले दीपक के सहारे जीवन गुजार रहे एक अत्यंत निर्धन परिवार को आखिरकार स्थायी रोशनी मिल गई। ग्राम प्रधान **मनोज गॉड** की पहल पर परिवार के घर में **सौर ऊर्जा से चलने वाली लाइट** लगवाई गई, जिससे अंधेरे में जलने वाला अंतिम दीपक भी इतिहास बन गया।

ग्राम प्रधान मनोज गॉड ने बताया कि गांव में एक **वृद्ध महिला अपने मानसिक रूप से दिव्यांग पुत्र के साथ रहती हैं**, जो बकरियां पालकर किसी तरह जीवन यापन करते हैं। परिवार के पास न तो बिजली का कनेक्शन है और न ही गैस की सुविधा। रात के समय महिला डीजल से जलने वाले दीपक के सहारे घर में रोशनी करती थी। ग्राम सभा में उनके घर के लिए बकरी बाड़ा निर्माण का प्रस्ताव पहले ही पारित किया जा चुका है।

इस मानवीय पहल में **महतोष पुलिस चौकी** की भी अहम भूमिका रही। चौकी प्रभारी **मुकेश मिश्रा** ने बताया कि मानसिक रूप से दिव्यांग युवक बकरियां चराते हुए कई बार **नेशनल हाईवे-74** तक चला जाता है। कुछ समय पूर्व एक अज्ञात वाहन की टक्कर से उसकी एक बकरी की मौत हो गई थी। मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने युवक को **जूते, कपड़े, मोज़े और जैकेट** उपलब्ध कराए।

जब पुलिसकर्मी युवक को घर छोड़ने पहुंचे तो परिवार की दयनीय स्थिति देखकर सभी भावुक हो गए। उन्होंने देखा कि परिवार आज भी **घास-फूस का बिछावन बनाकर उसी पर सोता है**। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने **समाजसेवी महिला मनप्रीत कौर** के सहयोग से परिवार को बिस्तर, कपड़े और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराया।

ग्राम प्रधान द्वारा सोलर लाइट लगाए जाने के बाद अब परिवार को स्थायी और सुरक्षित रोशनी मिल गई है। यह पहल न केवल सामाजिक संवेदनशीलता का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में **सौर ऊर्जा के उपयोग** की प्रेरक कहानी भी बन गई है।

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