देहरादून।नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले बेरोजगार नर्सिंग अधिकारियों का धरना शुक्रवार को 62वें दिन में प्रवेश कर गया। पिछले दो महीनों से अधिक समय से नर्सिंग अधिकारी एकता बिहार स्थित धरना स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक संबंधित विभाग अथवा प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई के अभाव में प्रदर्शनकारियों में आक्रोश और निराशा बढ़ती जा रही है।
धरना स्थल पर शुक्रवार का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला रहा, जब कई नर्सिंग अधिकारी अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठे नजर आए। आंदोलनरत नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता का सीधा असर उनके परिवारों पर पड़ रहा है। बच्चों के साथ धरना स्थल पर बैठना उनकी मजबूरी को दर्शाता है और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का एक शांतिपूर्ण प्रयास भी है।
नर्सिंग अधिकारियों ने मांग की कि पूर्व की भांति भर्ती प्रक्रिया को वर्षवार (ईयर-वाइज रिक्रूटमेंट) लागू किया जाए, जिससे लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे विभिन्न बैचों के अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके। उनका कहना है कि नियमित और वर्षवार भर्ती न होने के कारण बड़ी संख्या में प्रशिक्षित एवं योग्य नर्सिंग अधिकारी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
नर्सिंग एकता मंच के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से अपील की कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, नियमित और समयबद्ध बनाया जाए तथा स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं। उन्होंने कहा कि नर्सिंग अधिकारी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होते हैं, लेकिन भर्ती में हो रही देरी और अनियमितताओं के कारण न केवल युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि इसका प्रतिकूल असर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
धरना स्थल पर विकास पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती, मुकेश रमोला, शिरा, हेमंत, भास्कर, नीमा सोनिया, प्रीति सिंह, पवन सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर शांतिपूर्ण आंदोलन को जारी रखने का संकल्प दोहराया।
इस बीच नर्सिंग एकता मंच ने 7 फरवरी को एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की घोषणा की है। मंच के सदस्यों ने बताया कि इस शिविर के माध्यम से वे आम जनता को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।