देहरादून।
उत्तराखंड के उपनल कर्मियों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने **दस वर्ष की सेवा पूरी करने वाले उपनल कर्मियों को ‘समान कार्य के बदले समान वेतन’** देने का शासनादेश जारी कर दिया है। इस निर्णय के साथ ही मुख्यमंत्री धामी के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है।
उपनल कर्मी लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे थे। इस दौरान राज्य में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन उनकी यह प्रमुख मांग लंबित ही रही। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर यह जटिल और संवेदनशील मुद्दा सुलझा है, जिससे हजारों उपनल कर्मियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
सरकार के इस फैसले से न केवल उपनल कर्मियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विभागों में कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समान वेतन मिलने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता और जिम्मेदारी की भावना में भी सकारात्मक बदलाव आएगा, जिसका सीधा लाभ सरकारी कार्यप्रणाली को मिलेगा।
यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि धामी सरकार कार्मिक हितों को लेकर गंभीर और संवेदनशील है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य में **समान नागरिक संहिता**, **सख्त नकल विरोधी कानून**, **भू-कानून** और **धर्मांतरण विरोधी कानून** जैसे वर्षों से लंबित और जटिल मुद्दों पर ठोस व साहसिक निर्णय ले चुके हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि उपनल कर्मियों को समान कार्य के बदले समान वेतन प्रदान किया जाना सरकार की कार्मिक हितैषी नीति का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पहले दिन से ही कर्मचारियों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रही है और भविष्य में भी प्रदेश हित से जुड़े हर जटिल मुद्दे का समाधान निकालने के लिए अतिरिक्त प्रयास करती रहेगी।
इस फैसले को राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी स्वागतयोग्य कदम बताया है और इसे श्रम न्याय की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।