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नहीं रहीं सुशीला तिरिया: जनसेवा और आदिवासी अधिकारों की संघर्षशील नेता

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भुवनेश्वर |
ओडिशा की राजनीति और आदिवासी समाज के लिए 02 फरवरी का दिन शोकपूर्ण रहा। वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री, अनुभवी आदिवासी नेता और मयूरभंज से पूर्व सांसद सुशीला तिरिया का रविवार शाम निधन हो गया। 70 वर्षीय सुशीला तिरिया लंबे समय से बीमार चल रही थीं और भुवनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका उपचार चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

सुशीला तिरिया ओडिशा की उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थीं, जिन्होंने आदिवासी समाज की आवाज को राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचाया। उनका राजनीतिक सफर सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा। वर्ष 1986 में उन्हें ओडिशा से राज्यसभा के लिए चुना गया, जहां उन्होंने आदिवासी कल्याण, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया।

इसके बाद उन्होंने मयूरभंज लोकसभा क्षेत्र से 1994 और 1996 में लगातार दो बार जीत दर्ज कर संसद में प्रतिनिधित्व किया। संसद में रहते हुए सुशीला तिरिया ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी अधिकारों और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई। वह कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई, कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी), की सदस्य भी रहीं, जो उनके कद और राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है।

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उनके निधन पर ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। भक्त चरण दास ने कहा कि सुशीला तिरिया का जाना कांग्रेस पार्टी और आदिवासी समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि आदिवासी कल्याण और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा याद रखी जाएगी।

कांग्रेस नेता नवज्योति पटनायक ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सुशीला तिरिया के निधन से उत्तर ओडिशा की राजनीति में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन जनसेवा को समर्पित कर दिया और मयूरभंज के विकास के लिए निरंतर संघर्ष किया।

सुशीला तिरिया का निधन एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है, लेकिन आदिवासी अधिकारों के लिए उनका संघर्ष और योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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