नई दिल्ली |
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भरता को राष्ट्र निर्माण की बुनियाद बताते हुए कहा है कि आत्मनिर्भरता केवल एक आर्थिक अवधारणा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता वह दीपक है, जो देश को प्रगति और स्वाभिमान के मार्ग पर आगे ले जाता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट देश के युवाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में संस्कृत का एक सुभाषित उद्धृत करते हुए गहरा संदेश दिया। उन्होंने लिखा—
“नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते।
आत्मा तु पात्रतां नेयः पात्रमायान्ति सम्पदः॥”
इस सुभाषित के माध्यम से प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि अवसर और संपदा उसी व्यक्ति के पास आते हैं, जो स्वयं को योग्य और सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का मूल उद्देश्य युवाओं में कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप्स, नवाचार और रोजगार सृजन से जुड़े प्रावधान युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब युवा आत्मनिर्भर बनता है, तो देश स्वतः ही आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत का संकल्प केवल सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। हर नागरिक को अपनी क्षमताओं का विकास कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना होगा। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा, मेहनत और नवाचार के बल पर भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब देश आर्थिक सुधारों और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर की जा रही नीतियां भारत को मजबूत, सक्षम और आत्मविश्वासी राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही हैं।