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राज्यसभा में बड़ा खुलासा, जनभागीदारी से जल संरक्षण को मिली नई ताकत

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नई दिल्ली/देहरादून।
देश में जल संरक्षण और जल संचयन को लेकर चलाए जा रहे जल शक्ति अभियान ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री **राज भूषण चौधरी** ने सदन को बताया कि अभियान के अंतर्गत देशभर में **2 करोड़ से अधिक रिचार्ज सेक्टर** तैयार किए जा चुके हैं। इसके साथ ही जल संचयन–जन भागीदारी अभियान के तहत **40 लाख से अधिक वाटर स्ट्रक्चर** बनाए गए हैं, जिनमें जनसहभागिता की अहम भूमिका रही है।

जल शक्ति मंत्री ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “**जल संचय–जन भागीदारी**” के मंत्र का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस अभियान में आम लोगों ने स्वेच्छा से आगे बढ़कर अपने-अपने क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया। मंत्री ने कहा कि “कर्म क्षेत्र की ओर से मातृभूमि की तरफ” जैसे भावनात्मक आह्वान से प्रेरित होकर लोगों ने अपनी मातृभूमि में पुराने जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया और नए जल संचयन ढांचे विकसित किए।

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राज भूषण चौधरी ने कहा कि जनभागीदारी के इस मॉडल ने जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप दिया है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संकट से निपटने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

इसके अलावा मंत्री ने नमामि गंगे परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि गंगा नदी की स्वच्छता के लिए अब तक **218 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परियोजनाएं** शुरू की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लागत लगभग **35,698 करोड़ रुपये** है। इन परियोजनाओं के माध्यम से **6,610 एमएलडी क्षमता** के एसटीपी प्लांट के निर्माण या पुनर्वास और **5,238 किलोमीटर लंबे सीवरेज नेटवर्क** के बिछाने का कार्य किया गया है।

उन्होंने बताया कि इनमें से **138 परियोजनाएं**, जिनकी क्षमता लगभग **3,977 एमएलडी** है, पूरी हो चुकी हैं, जबकि **4,571 किलोमीटर** लंबा सीवरेज नेटवर्क भी अब तक तैयार किया जा चुका है। मंत्री ने कहा कि नमामि गंगे परियोजना के जरिए गंगा की स्वच्छता और अविरलता सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

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