नई दिल्ली।
राज्यसभा सांसद एवं भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष डॉ. नरेश बंसल ने देवभूमि उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और यमुना नदी के तटों के समग्र विकास की मांग राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठाई। उन्होंने शून्यकाल के दौरान केंद्र सरकार से यमुना नदी पर घाटों के निर्माण, सुचारु स्नान व्यवस्था तथा **नित्य आरती** के लिए ठोस और स्थायी इंतजाम करने की अपील की।
डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि उत्तराखंड केवल चारधाम यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में ऐसे अनेक प्राचीन धार्मिक स्थल, मंदिर श्रृंखलाएं और पौराणिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पर्यटन प्रकृति आधारित पर्यटन का अहम हिस्सा है, जो शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सौंदर्य की तलाश करने वाले पर्यटकों के लिए अत्यंत आकर्षक होता है।
उन्होंने सदन में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड धार्मिक आस्था, पौराणिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम है। यहां गंगा, यमुना, सरस्वती, सरयू जैसी पवित्र नदियां बहती हैं, जो देशी-विदेशी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं। राज्य के पर्वतीय क्षेत्र ट्रेकिंग, कैम्पिंग, वनस्पति अध्ययन और साहसिक गतिविधियों के लिए भी उपयुक्त हैं।
डॉ. बंसल ने लाखामंडल, पाताल भुवनेश्वरी, हनोल, धारी देवी जैसे प्राचीन मंदिरों और गुफाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये स्थल उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। इसके साथ ही कई ऐतिहासिक स्थल, शहीद स्मारक, जलप्रपात और घने जंगल पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जहां गंगा तटों पर धार्मिक गतिविधियों और आरती की व्यवस्था संतोषजनक है, वहीं यमुना नदी के तटों पर अभी भी घाट निर्माण, स्नान सुविधा और नित्य आरती की समुचित व्यवस्था की कमी है। यमुना क्षेत्र में होने वाले पौराणिक मेले और उत्सव वर्षों से पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं, जिन्हें और विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि उत्तराखंड में कई ऐसे चिन्हित एवं अविकसित गांव हैं, जिन्हें विकसित कर ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। आने वाले समय में ग्रामीण पर्यटन राज्य के समग्र विकास का एक सशक्त माध्यम बनेगा।