नए शहर, सस्ते घर और रेंटल हाउसिंग: उत्तराखंड के शहरी विकास की बड़ी योजना

देहरादून।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के **‘विकसित भारत–2047’** के संकल्प को ज़मीन पर उतारने और उत्तराखंड को सुनियोजित, आधुनिक व समावेशी राज्य के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री **पुष्कर सिंह धामी** के नेतृत्व में आवास और शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए **हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हडको)** के साथ संचालित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

सचिव आवास **डॉ. आर. राजेश कुमार** की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, रेंटल हाउसिंग योजना और भविष्य की शहरी विकास रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में दीर्घकालिक आवासीय जरूरतों को पूरा करना रहा, खासकर **ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग)** और **एलआईजी (निम्न आय वर्ग)** के लिए सस्ते, सुरक्षित और टिकाऊ आवास सुनिश्चित करना।

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए **2047 और 2050 तक की आवासीय आवश्यकताओं** के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और नए नगरों की परिकल्पना शामिल होगी।

हडको के क्षेत्रीय प्रमुख एवं राज्य प्रभारी **संजय भार्गव** ने भरोसा दिलाया कि नए शहरों और टाउनशिप के विकास, भूमि अधिग्रहण, मास्टर प्लानिंग और वित्तीय सहयोग में हडको राज्य सरकार को पूरा समर्थन देगा। अन्य राज्यों में नए नगर विकसित करने के अनुभव का लाभ उत्तराखंड को भी मिलेगा।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि योजनाएं केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहें, बल्कि **ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों** में भी सुनियोजित ढंग से लागू हों। इससे पलायन पर रोक लगेगी और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

राज्य के 10 पर्वतीय जिलों में **स्थानीय भवन तकनीक और पारंपरिक निर्माण सामग्री** के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी। इससे लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

बैठक में बताया गया कि हडको देहरादून द्वारा अब तक **1543.34 करोड़ रुपये** की ऋण राशि वाली **115 आवासीय व शहरी विकास परियोजनाओं** को मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार और हडको के संयुक्त प्रयासों से उत्तराखंड में आवास की उपलब्धता बढ़ेगी और राज्य आधुनिक व टिकाऊ विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।

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