वारसॉ। पोलैंड के उत्तरी हिस्से में स्थित छोटे से गांव बुकोविएत्स विएल्की में एक साधारण दिन अचानक ऐतिहासिक बन गया, जब एक किसान दंपती को अपने ही खेत में 17वीं सदी का चांदी का खजाना मिल गया। खेत की जुताई और पत्थर हटाने के दौरान फावड़े से टकराई चमकती चांदी ने न सिर्फ किसान को चौंका दिया, बल्कि पुरातत्व विशेषज्ञों को भी हैरानी में डाल दिया।
जांच में सामने आया कि मिट्टी के नीचे करीब 350 साल पुराना 162 चांदी के सिक्कों का खजाना दबा हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, ये सिक्के 1660 से 1679 के बीच के हैं, यानी उस दौर के जब पोलैंड-लिथुआनिया राष्ट्रमंडल युद्धों, राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा था। माना जा रहा है कि इसी असुरक्षित माहौल में किसी ने अपनी जमा-पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए जमीन में छिपा दिया होगा।
खजाने में अलग-अलग प्रकार और मूल्य के सिक्के शामिल हैं, जिनमें थैलर, टिम्फ, ऑर्ट और शोस्ताक प्रमुख हैं। सभी सिक्के चांदी के बने हुए हैं और कई पर टकसाल के निशान आज भी साफ दिखाई देते हैं। पुरातत्वविदों का कहना है कि ये सिक्के संभवतः किसी मिट्टी के बर्तन में रखे गए थे, जिसके टूटे हुए अवशेष खुदाई स्थल पर मिले हैं। सिक्कों का ज्यादा गहराई में न दबा होना इस बात की ओर इशारा करता है कि इन्हें जल्दबाजी में जमीन में छिपाया गया होगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस खजाने को किसने दफनाया और वह दोबारा इसे लेने क्यों नहीं लौटा। इतिहासकारों का मानना है कि यह किसी अमीर परिवार, स्थानीय जमींदार या व्यापारी की संपत्ति हो सकती है। उस समय क्षेत्र में युद्ध, लूटपाट और बीमारियों का खतरा आम था, जिससे कई लोग पलायन कर गए या मारे गए। संभव है कि खजाने का असली मालिक भी इन्हीं परिस्थितियों का शिकार हुआ हो।
खुदाई के दौरान केवल सिक्के ही नहीं, बल्कि मस्कट की गोलियां, पुराने बटन, बेल्ट की बकल, अंगूठियां और धार्मिक पदक भी मिले हैं। एक पदक पर ब्लैक मैडोना ऑफ चेंस्टोहोवा और संरक्षक देवदूत की आकृति उकेरी गई है, जो उस समय की गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाती है। इसके अलावा पास में पत्थर से बनी एक पुरानी इमारत के अवशेष भी मिले हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह इलाका कभी किसी जमींदारी हवेली या बड़े कृषि परिसर का हिस्सा रहा होगा।
पोलैंड के कानून के अनुसार, इस तरह की ऐतिहासिक खोजें सरकार की संपत्ति मानी जाती हैं। इसलिए यह पूरा खजाना अब म्यूजियम ऑफ द बॉर्डरलैंड इन ड्जियाल्दोवो को सौंप दिया गया है, जहां इसे सुरक्षित रखा जाएगा और आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।