जलागम महोत्सव 2025-26: सूखे क्षेत्रों में हरियाली और किसानों की आय बढ़ाने की पहल

देहरादून/पौड़ी। उत्तराखंड के सतत विकास में जल संरक्षण की भूमिका को रेखांकित करते हुए कैबिनेट मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने कहा कि पर्वतीय राज्य के लिए जल संसाधनों का संरक्षण और समुचित प्रबंधन विकास की आधारशिला है। यह बात उन्होंने नगर पंचायत सतपुली में आयोजित राज्य स्तरीय जलागम महोत्सव 2025-26 के दौरान कही। कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–जलागम विकास घटक के अंतर्गत भव्य रूप से किया गया।

महोत्सव के दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा बीरोंखाल विकासखंड के मैठाणाघाट, स्यूंसी और फरसाड़ी में स्थापित जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना यूनिट कार्यालयों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–जलागम विकास घटक 2.0, उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (सारा), हरित कृषि परियोजना और जीईएफ-6 परियोजना के तहत संचालित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की गई।

सतपाल महाराज ने कहा कि जलागम योजनाओं के माध्यम से वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलागम विकास घटक से सूखे क्षेत्रों में हरियाली लौट रही है, किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और गांवों को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

सचिव जलागम दिलीप जावलकर ने बताया कि जलागम विकास घटक 2.0 के अंतर्गत योजनाओं को वैज्ञानिक, सहभागी और परिणाम-आधारित दृष्टिकोण से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल संरचनाएं बनाना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और लोगों की आय बढ़ाना है, जिससे भू-जल स्तर में सुधार और आपदाओं के जोखिम में कमी आई है।

प्रोजेक्ट डायरेक्टर जीईएफ-6 कहकशा नसीम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए जलागम परियोजनाएं डिज़ाइन की जा रही हैं। इनके माध्यम से सूखते नौले-धारे पुनर्जीवित हो रहे हैं और पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिल रहा है।

कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कृषकों और ग्रामों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र चौहान, डीएफओ महातिम यादव, जलागम विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, लाभार्थी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

 

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