देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। रुड़की स्थित कोर यूनिवर्सिटी में आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में भारतीय खेलों के परिदृश्य में ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। यह समय भारतीय खेल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन चुका है।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक खेल आयोजन नहीं है, बल्कि भारत की उस अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव है, जो हर कठिनाई को अवसर में बदलने का साहस रखती है। उन्होंने कहा कि पावरलिफ्टिंग अनुशासन, धैर्य, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह खेल केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और आत्मसम्मान की भी मिसाल प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री ने देश के दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वे हर क्षेत्र में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर, इंग्लिश चैनल पार करने वाले सत्येंद्र सिंह लोहिया, विश्व पैरा तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली शीतल देवी, टोक्यो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक विजेता अवनी लेखरा और सुमित अंतिल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने दुनिया को दिखा दिया कि सीमाएं केवल सोच में होती हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत ने 29 पदक जीतकर इतिहास रचा, जबकि 2025 में दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने 110 पदक हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने पद्मश्री दीपा मलिक का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी है।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को नई दिशा मिली है। खेल बजट में तीन गुना वृद्धि और ‘खेलो इंडिया’ जैसी योजनाओं ने देशभर में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन ने उत्तराखंड को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी पहचान दिलाई है। अंत में मुख्यमंत्री ने दिव्यांग खिलाड़ियों के अभिभावकों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ खड़ी है।