आज सूरज के सबसे करीब पृथ्वी, रात में चमकेगा सुपरमून जैसा पूर्णिमा का चांद

खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए आज शनिवार का दिन बेहद खास और रोमांचक रहने वाला है। नए साल की शुरुआत में एक दुर्लभ खगोलीय संयोग देखने को मिल रहा है, जब पृथ्वी और चंद्रमा दोनों ही अपने-अपने पथ पर विशेष स्थिति में पहुंच रहे हैं। एक ओर जहां पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते हुए उसके सबसे नजदीकी बिंदु पर पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्णिमा का चंद्रमा भी पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब रहकर लगभग सुपरमून जैसा दृश्य प्रस्तुत करेगा।

मध्य प्रदेश की नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि आकाश में सभी खगोलीय पिंड अंडाकार कक्षा में भ्रमण करते हैं। इस कारण परिक्रमा के दौरान वे कभी अपने केंद्रीय पिंड के सबसे पास और कभी सबसे दूर होते हैं। पृथ्वी का सूर्य के सबसे निकट पहुंचने का यह बिंदु ‘पेरिहेलियन’ कहलाता है।

उन्होंने बताया कि आज शनिवार की रात 10 बजकर 45 मिनट पर पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीक होगी। इस समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 14 करोड़ 70 लाख 99 हजार 894 किलोमीटर रह जाएगी। इसके विपरीत जुलाई महीने में जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होगी, तब यह दूरी बढ़कर करीब 15 करोड़ 20 लाख 87 हजार 774 किलोमीटर हो जाएगी।

सारिका घारू ने सोशल मीडिया पर फैल रही ‘वुल्फ सुपरमून’ की चर्चाओं पर भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि चंद्रमा 1 जनवरी को पृथ्वी के सबसे नजदीक बिंदु पर था और अब धीरे-धीरे दूर जा रहा है। इसलिए आज दिखने वाला पूर्णिमा का चंद्रमा पूरी तरह सुपरमून नहीं है, लेकिन इसका आकार और चमक सुपरमून जैसी प्रतीत होगी।

आज पूर्णिमा की स्थिति में चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित रहेगा और पृथ्वी से इसकी दूरी लगभग 3 लाख 62 हजार किलोमीटर होगी। यह चंद्रमा शाम को उदित होकर पूरी रात आकाश में दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि वास्तव में सबसे बड़ा और चमकदार सुपरमून देखने के लिए खगोल प्रेमियों को 24 दिसंबर तक इंतजार करना होगा।

सारिका ने कहा कि नए साल के पहले सप्ताह में सूर्य और चंद्रमा दोनों का पृथ्वी के नजदीक आना एक सुंदर संयोग है। ऐसे में इस वीकेंड पर आकाश की ओर नजर उठाकर प्रकृति के इन अद्भुत नजारों के साथ नववर्ष 2026 का स्वागत करना न भूलें।

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