याचिका में 1971 की कटऑफ तिथि के बाद बांग्लादेश से प्रवेश का आरोप; पुरानी मतदाता सूचियों में नाम न होने का दावा; चार सप्ताह में पक्ष रखने का निर्देश
गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। गौहाटी हाईकोर्ट ने करीमगंज जिले की रताबाड़ी (एससी) विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक बिजॉय मालाकार की भारतीय नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और असम सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों सरकारों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह याचिका क्रमांक डब्ल्यूपी(सी) संख्या 7368/2025 के तहत दर्ज की गई है। याचिकाकर्ता श्रीभूमि जिले के निवासी ब्रजा गोपाल सिन्हा और बिजॉय कुमार कानू हैं, जिन्होंने आरोप लगाया है कि विधायक बिजॉय मालाकार एवं उनके माता-पिता 25 मार्च 1971 की कटऑफ तिथि के बाद बांग्लादेश से असम में अवैध रूप से प्रवेश किए थे, जिससे वे भारतीय नागरिकता के लिए अयोग्य हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि मालाकार का नाम 1966 और 1971 की मतदाता सूचियों में कहीं नहीं मिलता और पहली बार 2005 की पूरक मतदाता सूची में शामिल हुआ। उनके पिता का नाम भी 1966, 1971 तथा 2005 की सूचियों में अनुपस्थित है, जबकि 2025 की सूची में यह नाम है लेकिन 1971 से पूर्व के रिकॉर्ड से कोई संबंध नहीं स्थापित हो सका। मालाकार की मां का नाम किसी भी मतदाता सूची में दर्ज नहीं है।
याचिका में श्रीभूमि जिला निर्वाचन अधिकारी की 29 नवंबर 2025 की सत्यापन रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें 1971 से पहले के रिकॉर्ड से कोई लिंक नहीं मिला और रिपोर्ट को ‘अनिर्णायक’ करार दिया गया।
याचिका कर्ताओं ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 191(1)(डी) तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो मालाकार को विधानसभा सदस्यता से अयोग्य ठहराया जा सकता है।
असम में नागरिकता और अवैध प्रवासन का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है, यहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) जैसे विषय राजनीतिक बहस का केंद्र बने रहते हैं।
हालांकि, इस मामले में अभी केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा विधायक बिजॉय मालाकार ने भी इस पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।
जानकारों का मानना है कि यह याचिका असम की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकती है, खासकर रताबाड़ी सीट पर जहां भाजपा की मजबूत पकड़ मानी जाती है।