संवेदनशीलता नेतृत्व के लिए अनिवार्य है: निधि यादव

नेतृत्व के लिए पात्रता निर्मित करना होगा: निधि यादव

छोटे-छोटे संघर्ष विरासत का संघर्ष हो जाते हैं: निधि यादव

देहरादून। स्थानीय सुशासन को अधिक सशक्त, समावेशी एवं उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से “बदलाव का नेतृत्व: स्थानीय सुशासन और उसके परे महिला नेतृत्व को सशक्त बनाना” विषय पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers – ToT) कार्यक्रम का आज सफल समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 15 से 18 दिसम्बर, 2025 तक राज्य पंचायत संसाधन केंद्र (SPRC) भवन, पंचायतीराज निदेशालय, देहरादून में आयोजित किया गया।

यह राज्य स्तरीय प्रशिक्षण पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार के विशेष अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पंचायतीराज संस्थाओं में महिला प्रतिनिधियों के नेतृत्व कौशल, संवाद क्षमता, संवैधानिक समझ तथा स्थानीय प्रशासन के प्रभावी संचालन को सुदृढ़ करना है। प्रशिक्षण में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए 44 प्रतिभागियों—जिनमें सहायक विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी तथा पूर्व एवं वर्तमान पंचायत प्रतिनिधि शामिल थे—ने सक्रिय सहभागिता की।

चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वयस्क शिक्षा सिद्धांत, प्रभावी संचार कौशल, नेतृत्व एवं प्रभाव, प्रशिक्षण तकनीक, जेंडर एवं पितृसत्ता की अवधारणा, 73वां संविधान संशोधन, पंचायतीराज व्यवस्था, हितधारक मैपिंग, फंड–फंक्शन–फंक्शनरी, ग्राम सभा की प्रक्रिया तथा निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की भूमिका एवं दायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण को सहभागी एवं प्रभावी बनाने के लिए लघु समूह गतिविधियाँ, रोल-प्ले, माइक्रो लैब अभ्यास तथा समूहवार प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं।

इस चार दिवसीय टीओटी कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की लगभग 19,000 महिला पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने हेतु एक सशक्त प्रशिक्षण कैडर तैयार करना है। इसी क्रम में प्रशिक्षित राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स आगामी चरण में कुमाऊँ एवं गढ़वाल मंडलों के अंतर्गत 190 जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेंगे। इसके लिए दो बैचों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो क्रमशः 22 से 25 दिसम्बर, 2025 तथा 27 से 30 दिसम्बर, 2025 के मध्य संपन्न होंगे। इस दौरान ग्राम सभा की प्रक्रिया, मौखिक एवं अमौखिक संचार कौशल, जिला एवं विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण विस्तार की रणनीति पर विशेष सत्रों के साथ-साथ महिला जनप्रतिनिधियों हेतु थीम गीत का सामूहिक गायन भी किया गया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए निदेशक पंचायतीराज एवं अपर सचिव, उत्तराखंड सरकार, श्रीमती निधि यादव ने कहा कि “गांव को सशक्त बनाने के लिए महिला जनप्रतिनिधियों को सशक्त करना अनिवार्य है।” उन्होंने वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक पंचायतीराज व्यवस्था एवं समितियों के विकास पर प्रकाश डालते हुए जेंडर समानता, महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सामाजिक न्याय, संवेदनशीलता और समान अवसर पर विशेष बल दिया।

उन्होंने पंचायत राज की नीचे से ऊपर (Bottom-Up Approach) वाली लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं—जैसे प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान—की जानकारी दी।

अपने संबोधन में उन्होंने तीन नए आपराधिक कानूनों (BNS) तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम की भी जानकारी देते हुए महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता नेतृत्व के लिए अनिवार्य है, नेतृत्व के लिए पात्रता निर्मित करना होगा और छोटे छोटे संघर्ष विरासत का संघर्ष हो जाते है।

समापन अवसर पर निदेशक पंचायतीराज श्रीमती निधि यादव द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में महिला नेतृत्व को सशक्त करने तथा जमीनी स्तर पर प्रभावी, समावेशी एवं उत्तरदायी सुशासन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक पंचायतीराज श्री राजीव कुमार नाथ त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक श्रीमती हिमाली जोशी पेटवाल सहित विभाग के अन्य अधिकारी, प्रशिक्षण दल एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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