नबीन जी का ‘डिजिटल’ स्वागत!

विशेष रिपोर्ट

बीजेपी के नए कार्यकारी अध्यक्ष के स्वागत में AI का दखल

न हाथ मिलाया, न फोटो खिंचवाई,फिर घंटी बजी और ‘भक्त’ चल दिए

स्मार्टफोन, स्कैनर और प्रोटोकॉल के बीच कशमकश में फंसे दिखे कार्यकर्ता!

अमर श्रीकांत/ नई दिल्ली।

भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का इन दिनों पार्टी मुख्यालय में जोरदार स्वागत हो रहा है।

पद संभालने के बाद से ही दोपहर 12:30 बजे मुख्यालय का 150 की क्षमता वाला हॉल देश भर से आए कार्यकर्ताओं के उत्साह से लबालब रहता है। लेकिन इस उत्साह के बीच एक अजीब सी कशमकश भी है! जी हां, तकनीक और प्रोटोकॉल के बीच कार्यकर्ता खुद को थोड़ा ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

VIP को ‘क्लिक’ और आम को ‘स्कैनर’

कार्यकर्ताओं के बीच फोटो खिंचवाने की होड़ को नियंत्रित करने के लिए इस बार तकनीक का सहारा लिया गया है। हॉल में दो सरकारी फोटोग्राफर तैनात हैं, लेकिन उनके कैमरे का लेंस अक्सर ‘VIP’ चेहरों की तलाश में रहता है। साधारण कार्यकर्ताओं को हॉल के बाहर चिपके एक QR स्कैनर की ओर इशारा कर दिया जाता है। हिदायत दी जाती है—”स्कैनर का फोटो लें, गूगल पर जाएं, अपनी सेल्फी डालें और एआई (AI) के जरिए नितिन जी के साथ अपनी फोटो खुद पा लें।” नई तकनीक का यह कौतुक कार्यकर्ताओं को लुभा तो रहा है, पर व्यक्तिगत जुड़ाव की कमी भी खल रही है।

‘ज्ञान’ सत्र और पाबंदियां

नितिन नबीन का काफिला ठीक दोपहर 12 बजे मुख्यालय पहुंचता है, लेकिन कार्यकर्ताओं तक पहुंचने से पहले करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में पदाधिकारियों का ‘ज्ञान सत्र’ चलता है। जब वे हॉल में आते हैं, तो घोषणाओं का दौर शुरू हो जाता है—”कोई पैर नहीं छुएगा, कोई मोबाइल से निजी फोटो नहीं लेगा।” अनुशासन के इन सख्त घेरों के बीच कार्यकर्ता फूलों और शॉल के साथ अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

जब बज उठी मोबाइल की घंटी

मिलने-मिलाने का सिलसिला अभी रफ्तार पकड़ ही रहा होता है कि अचानक एक मोबाइल की घंटी बजती है। सुरक्षाकर्मी अध्यक्ष के कान में कुछ बुदबुदाता है और देखते ही देखते ‘दरबार’ खत्म हो जाता है। करीब 100 लोगों से मिलने के बाद, बाकी बचे 50 कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए नितिन जी तुरंत बाहर निकल जाते हैं।

पीछे छूटे मायूस कार्यकर्ता दबी जुबान में चुटकी लेते हैं—”अध्यक्ष जी सच में बड़े भक्त हैं, जैसे ही (ऊपर से) घंटी बजी, कार्यकर्ताओं को छोड़ ‘गुरु मंत्र’ लेने निकल गए।” हालांकि, यह मायूसी क्षणिक होती है। अगली ही पल ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ कार्यकर्ता हॉल से बाहर निकल जाते हैं, शायद इस उम्मीद में कि अगली बार घंटी देर से बजेगी।

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