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संसद हमला बरसी: शहीदों को नमन, नेताओं के शब्दों में देश का संकल्प

नई दिल्ली। संसद भवन पर हुए आतंकी हमले की बरसी पर देश ने एक बार फिर अपने वीर सपूतों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की एकजुटता और दृढ़ संकल्प को दोहराया।

13 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़े पांच आतंकियों ने देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था—संसद भवन—पर हमला किया था। इस कायराना हमले का भारतीय सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस और त्वरित कार्रवाई से सामना किया। अपनी जान की परवाह किए बिना सुरक्षाकर्मियों ने आतंकियों के मंसूबों को नाकाम किया और सभी हमलावरों को मार गिराया। इस दौरान दिल्ली पुलिस के पांच जवान, एक महिला कांस्टेबल और दो सुरक्षा गार्डों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका यह बलिदान लोकतंत्र की रक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध देश की अडिग प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि उनकी अतुलनीय वीरता और बलिदान राष्ट्र की स्मृति में सदैव अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ एकजुट, मजबूत और सतर्क है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसद पर हुए आतंकी हमले को राष्ट्र की स्वायत्तता, स्वाभिमान और लोकशक्ति पर नृशंस आघात करार दिया। उन्होंने संसद की गरिमा की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले अमर वीरों को नमन किया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए दिया गया जवानों का अमर बलिदान देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है और आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्यबोध सिखाता है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि संसद पर हुए आतंकी हमले में बलिदान देने वाले वीर सपूतों का त्याग भारत की लोकतांत्रिक आत्मा की रक्षा के प्रति उनके अडिग संकल्प का प्रतीक है, जो सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

 

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