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लोकतंत्र खतरे में? शीतकालीन सत्र से पहले विपक्ष क्यों हुआ हमलावर?

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नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार को देश की सुरक्षा, लोकतंत्र और प्रशासनिक ढांचे पर कथित खतरे के मुद्दों को लेकर कटघरे में खड़ा किया। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि इस बार शीतकालीन सत्र केवल 15 बैठकों का होगा, जो अब तक के सबसे छोटे सत्रों में से एक है। उनके अनुसार, इससे सरकार की गंभीरता और संसदीय परंपराओं के प्रति उदासीनता झलकती है।

गोगोई ने आरोप लगाया कि सत्र को आयोजित करने में अनावश्यक देरी की गई, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि लोकतांत्रिक वातावरण को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बैठक में देश की सुरक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाया। हाल ही में दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट को उन्होंने कानून-व्यवस्था की विफलता बताया और कहा कि सरकार इस पर चर्चा के लिए भी तैयार नहीं है।

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उन्होंने वायु प्रदूषण, किसानों-मजदूरों की आय, प्राकृतिक आपदाओं, और आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर भी सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। विदेश नीति पर बोलते हुए गोगोई ने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है और “किसी अन्य देश के दबाव” में रूस से तेल आयात रोकने का निर्णय लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा खतरे में है और सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के लिए तैयार नहीं दिखती।

गोगोई ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में बुधवार को विपक्षी दलों की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

 

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