जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनिल बलूनी का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो बहुत ही असहाय और असमर्थ नज़र आ रहे हैं डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद भी संसद महोदय को बड़ी मुश्किल होती है केंद्र सरकार में जाकर विदेश मंत्री से मुलाक़ात करने में, सांसद महोदय की पूरी संसद निधि भी खर्च हो गई परंतु दूसरा पासपोर्ट ऑफिस जो वो गढ़वाल में स्थापित करना चाहते थे वो फाइल अब तक कहाँ अटकी है उन्हें पता नहीं बड़े शर्म की बात है की अपनी ही पार्टी की सरकार में उन्हें मंत्रियों और अधिकारियों के हाथ जोड़ने पर रहे हैं तब भी वो अपना काम नहीं करवा पा रहे हैं तो जरा ये सोचिए की विपक्ष के सांसदों को अपने छेत्रों में काम करवाने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता होगा। अनिल बलूनी का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय जनता पार्टी में कुछ भी ठीक नहीं है और ये ख़ुद खंड खंड में बँटे हुए हैं । अपने आपको अनुशासित कहने वाली पार्टी अब खुलकर पार्टी के ख़िलाफ़ अनुशासनहीनता को नज़रअंदाज़ कर रही है क्यूंकि बात धामी जी की कुर्सी की है। अनिल बलूनी और धामी के बीच का शीट युद्ध किसी से छिपा नहीं है देखना ये है की वो पासपोर्ट दफ्तर आखिर कौन नहीं चाहता की खुले और बलूनी को उसका श्रेय मिले।