सोनपुर मेले में दिखा गज-ग्राह युद्ध का अद्भुत चमत्कार—सैंड आर्ट देखकर लोग रह गए दंग!

सारण। विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला इस बार अपनी पारंपरिक भव्यता, सांस्कृतिक विरासत और आस्था के रंगों के साथ और भी खास बन गया है। हर साल की तरह यहां लाखों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन इस बार मेले में एक अनोखी कलाकृति लोगों के बीच अद्भुत आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय कलाकार अशोक कुमार द्वारा बनाया गया ‘गज-ग्राह’ कथा पर आधारित सैंड आर्ट न सिर्फ दर्शकों को चकित कर रहा है, बल्कि पूरे मेले की पहचान का प्रतीक बन गया है।

अंग्रेजी बाजार स्थित जिलाधिकारी आवास के पास इस विशाल बालू कलाकृति को प्रदर्शित किया गया है। पौराणिक कथा पर आधारित यह सैंड आर्ट उस ऐतिहासिक और दिव्य क्षण को दर्शाता है, जब भगवान विष्णु ने गज—यानी हाथी—को मगरमच्छ (ग्राह) के चंगुल से मुक्त कराया था। कथा के अनुसार, ग्राह वर्षों से गज को पकड़कर पानी में खींचने का प्रयास करता रहा। अंततः जब हाथी ने आर्तनाद कर भगवान विष्णु का स्मरण किया, तब विष्णु ने सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गज को जीवनदान दिया।
अशोक कुमार ने इस पौराणिक क्षण को इतने जीवंत तरीके से उकेरा है कि देखने वाला एक पल के लिए मानो कथा की उसी दुनिया में पहुँच जाता है। हाथी की व्यथा, मगरमच्छ का आक्रमक रूप और विष्णु की दिव्य उपस्थिति—तीनों को इतनी सूक्ष्मता से रेत में गढ़ा गया है कि यह कलाकृति आस्था और कला का अनोखा संगम बन जाती है।

मेले की पहचान भी दिखी कलाकृति में

सोनपुर मेला सिर्फ अपनी धार्मिक मान्यता के लिए नहीं, बल्कि एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के रूप में भी जाना जाता है। इसी पहचान को ध्यान में रखते हुए कलाकार ने सैंड आर्ट के एक हिस्से में घोड़ा, बैल और अन्य पशुओं की आकृतियां भी उकेरी हैं, जो इस मेले की पारंपरिक विरासत को दर्शाती हैं।

इसके साथ ही इस कलाकृति में बिहार का खूबसूरती से बनाया गया मानचित्र भी मौजूद है, जिसमें सोनपुर का स्थान स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। यह दर्शाता है कि कलाकृति सिर्फ पौराणिक कथा तक सीमित नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक जड़ों और क्षेत्रीय पहचान को भी सम्मान देती है।

बिहार सरकार और प्रशासन का प्रतीक चिन्ह भी शामिल

मेले के प्रचार-प्रसार को और व्यापक बनाने के उद्देश्य से कलाकार ने इसमें जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और बिहार सरकार का आधिकारिक सोनपुर मेला प्रतीक चिन्ह भी जोड़ा है। यह प्रतीक चिन्ह सैंड आर्ट में बेहद आकर्षक ढंग से उभरा हुआ नजर आता है, जो मेले की आधुनिक पहचान और सरकारी प्रयासों की झलक प्रदान करता है।

कलाकारों की मेहनत बन गई मेले की शोभा

इस सैंड आर्ट को तैयार करने वाले कलाकार अशोक कुमार ने बताया कि इस कृति को आकार देने में स्थानीय कलाकार सोनू कुमार का भी अहम योगदान रहा। दोनों कलाकारों ने कई दिनों की लगातार मेहनत और बारीक कला कौशल के साथ इसे तैयार किया है। यह कलाकृति स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच भी प्रदान कर रही है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया भी बेहद सकारात्मक रही। मेले में आने वाले लोग इस सैंड आर्ट के सामने रुककर तस्वीरें खींच रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं और कलाकारों की सराहना कर रहे हैं। कई लोग इसे मेले का “सबसे यादगार आकर्षण” बता रहे हैं।

सोनपुर मेले की संस्कृति में नई जान

यह सैंड आर्ट न सिर्फ धार्मिक कथा का संदेश देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि लोककलाओं से लेकर आधुनिक कला तक—सोनपुर मेला हर रूप में समृद्ध है। अशोक कुमार की यह अनोखी कृति मेले की परंपरा और समकालीन कला का अद्भुत मेल है, जो आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बनने वाला है।

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