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नाबालिगों की सुरक्षा और यात्री कल्याण सुनिश्चित करने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की आरपीएफ निरंतर सतर्क

मालीगांव। नाबालिग यात्रियों की सुरक्षा और मानव तस्करी रोकने के प्रयास में, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 25 से 30 अक्टूबर, 2025 के बीच उल्लेखनीय सफलता हासिल की। इस अवधि के दौरान, आरपीएफ कर्मियों ने एनएफआर के अधीन विभिन्न स्टेशनों से 10 नाबालिगों (07 लड़के और 03 लड़कियां) को रेस्क्यू किया। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आगे की आवश्यक कार्रवाई और पुनर्वास के लिए चाइल्ड लाइन अधिकारियों, एनजीओ, संबंधित अभिभावकों और स्थानीय पुलिस को सुरक्षित रूप से सौंप दिया गया।
25 अक्टूबर, 2025 को डिमापुर और चापरमुख की रेलवे सुरक्षा बल की टीमों ने अपने अभियानों के दौरान कुल 03 नाबालिगों (02 लड़के और 01 लड़की) को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को बाद में सुरक्षित अभिरक्षा और देखभाल के लिए निर्दिष्ट चाइल्डलाइन अधिकारियों को सौंप दिया गया।
27 से 30 अक्टूबर, 2025 तक, अगरतला, डिमापुर, किशनगंज और अलीपुरदुआर जं. की आरपीएफ टीमों ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान चलाया। इन अभियानों के दौरान, डिमापुर से 03 नाबालिग लड़के, अलीपुरद्वार जं. से 02 और अगरतला तथा किशनगंज स्टेशनों से एक-एक नाबालिग लड़की को रेस्क्यू किया गया।

रेलवे सुरक्षा बल के महिला दस्ता “मेरी सहेली” पहल, जो विशेष रूप से अकेले यात्रा करने वाली महिला यात्रियों की सुरक्षा और कल्याण पर केंद्रित है, लगातार सक्रिय और सतर्क हैं। इसके निरंतर प्रयासों ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में महिला यात्रियों के लिए एक सुरक्षित यात्रा वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समय पर हस्तक्षेप, सतर्कतापूर्वक गश्त और विभिन्न यात्री-अनुकूल उपायों के माध्यम से यात्री सुरक्षा के प्रति पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की रेलवे सुरक्षा बल की प्रतिबद्धता बरकरार है, जिसमें महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है।

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