हरिद्वार से संदेश: सुप्रीम कोर्ट फैसले से पहले आंदोलन, देश और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा

प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम के पीठाधीश्वर **स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश** ने हाल ही में **वक्फ संशोधन कानून** के विरोध में देशव्यापी आंदोलनों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने किया था, लेकिन इसके बावजूद अंतिम फैसले की प्रतीक्षा किए बिना आंदोलन की घोषणाएं की जा रही हैं।

स्वामी रूपेंद्र ने इसे **विचित्र स्थिति** बताया कि एक ओर मुस्लिम संगठन न्यायालय में कानून को चुनौती दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिना सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा किए देशव्यापी विरोध शुरू कर दिया गया है। उन्होंने चिंता जताई कि बारावफात जैसे कार्यक्रमों के दौरान पहले ही कई स्थानों पर हिंसा हुई है, और अब भी कार्यक्रमों और जुलूसों में हिंसा के समाचार सामने आ रहे हैं।

स्वामी रूपेंद्र ने कहा कि **संत समाज** को आशंका है कि वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलन हिंसा और तोड़फोड़ की बड़ी घटनाओं का कारण बन सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आंदोलन के आयोजकों की जिम्मेदारी है कि कार्यक्रम **शांतिपूर्ण** रहें और किसी भी प्रकार की संपत्ति की तोड़फोड़, दंगा या मारपीट न हो।

इसके साथ ही, **श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन** के **निर्वाण कोठारी राघवेंद्र दास** ने सरकारों से अपील की कि वह सभी संभावित परिस्थितियों के लिए पूर्व तैयारी करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही उत्तेजना, कानून व्यवस्था और सामाजिक संबंधों को चुनौती देने वाले अभियानों पर नजर रखकर सरकार को हर संभव प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने समाज के लोगों से भी आग्रह किया कि इस **घृणा और उन्माद के अभियान** के मद्देनजर सतर्क रहें और आत्मरक्षा के सभी आवश्यक कदम उठाएं। स्वामी रूपेंद्र ने यह स्पष्ट किया कि यह देश और सामाजिक सौहार्द के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है और इसे रोकने की जिम्मेदारी आंदोलन आयोजकों और प्रशासन दोनों की है।

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