देहरादून। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में बेटियों को सम्मान और सशक्तिकरण का सुंदर संदेश मिला। शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, गढ़ी कैंट में आयोजित “बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम” में वर्ष 2024 और 2025 की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 326 मेधावी बालिकाओं को पुरस्कार स्वरूप स्मार्टफोन भेंट किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार नारी सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और यह पहल उसी दिशा में एक सशक्त कदम है। उन्होंने कहा कि “बेटियों के शिक्षित होने से न केवल परिवार, बल्कि पूरी पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल होता है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष हाईस्कूल परीक्षा में 90% विद्यार्थी सफल हुए, जिनमें 93% से अधिक बालिकाएँ शामिल हैं। वहीं, इंटरमीडिएट परीक्षा में 83% विद्यार्थी** सफल हुए, जिनमें **बालिकाओं की सफलता दर 86% से अधिक रही। उन्होंने कहा कि यह बेटियों के परिश्रम, प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्ष 2013 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत अब तक 2029 मेधावी बालिकाएं तकनीकी रूप से सशक्त बन चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए **मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजन, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना और नंदा गौरा योजना जैसी कई योजनाओं का संचालन कर रही है। इन योजनाओं से बेटियाँ न केवल शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, बल्कि स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों** के माध्यम से आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की प्रगति नारी शक्ति से ही संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं को ऐतिहासिक बताया।
कार्यक्रम में **महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या** ने कहा कि सरकार बेटियों की शिक्षा, आर्थिक आजादी और आत्मनिर्भरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि वे चुनौतियों से न डरें और अपने जीवन की दिशा स्वयं तय करें।
इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, राज्य मंत्री प्रताप सिंह पंवार, सचिव चन्द्रेश कुमार, परियोजना अधिकारी मोहित चौधरी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।