देहरादून की रामलीला ने रचा इतिहास – 75 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा भव्य आयोजन!

देहरादून। उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवंत करने वाले **‘भव्य रामलीला महोत्सव 2025’** का शानदार समापन रेसकोर्स स्थित **श्री गुरु नानक मैदान** में हुआ। परंपरा के अनुसार **‘हनुमान ध्वजा विस्थापना’** और हवन-पूजन के साथ इस 12 दिवसीय आयोजन का समापन हुआ। इस बार की रामलीला ने रिकॉर्ड कायम करते हुए **75 लाख से अधिक दर्शकों** तक अपनी पहुंच बनाई और **उत्तराखंड का सबसे बड़ा ऑनलाइन सांस्कृतिक आयोजन** बन गई।

यह आयोजन **“श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजी.)”** द्वारा किया गया। समिति ने गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी **पुरानी टिहरी** में 1952 से चली आ रही इस रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में भव्य रूप में पुनर्जीवित किया है। अध्यक्ष **अभिनव थापर** ने बताया कि इस वर्ष रामलीला में पौराणिकता और **आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम** देखने को मिला। पहली बार **लेजर और साउंड शो** के साथ दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें “उड़ता पुष्पक विमान, आकाश में रावण-जटायु संग्राम, मेघनाथ-हनुमान नागपाश, लक्ष्मण शक्ति, राम-रावण युद्ध, सीता अग्निपरीक्षा” जैसे दृश्य शामिल रहे।

भव्य मंचन के साथ-साथ आयोजन में **राम भजन संध्या, रावण-दहन, भव्य मेला, कलश यात्रा** और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति पर आधारित **सांस्कृतिक कार्यक्रमों** का समावेश किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने **समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य** भी किया।

अध्यक्ष अभिनव थापर ने बताया कि इस वर्ष की रामलीला को **34 से अधिक क्षेत्रीय पोर्टलों** और **विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स** के माध्यम से 75 लाख से अधिक लोगों ने देखा और एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक यह आयोजन पहुंचा। यह उत्तराखंड के इतिहास में किसी भी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

समापन दिवस पर समिति ने 1952 से अब तक जुड़े **पूर्व कलाकारों और उनके परिवारों** को सम्मानित किया। मंचन में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, स्वयंसेवक समितियों, संगीतकारों, कीर्तन मंडलियों और सोशल मीडिया वालंटियर्स को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में **टपकेश्वर महादेव मंदिर समिति**, **श्री गंगा सभा**, **दून व्यापार मंडल**, **राज्य आंदोलनकारी**, **कीर्तन मंडलियाँ**, **विक्रम एवं ऑटो यूनियन**, **लोक कलाकार**, **संत समाज** और **मातृशक्ति समूहों** सहित समाज के हर वर्ग का सहयोग मिला।

रामलीला के समापन के साथ **हनुमान ध्वजा विस्थापना की पौराणिक परंपरा** निभाई गई, जो अब तक टिहरी में होती आई है। अगले वर्ष **जन्माष्टमी के अवसर पर ध्वजा पुनः स्थापित** की जाएगी।

समिति की बैठक में अध्यक्ष **अभिनव थापर**, **अमित पंत**, **दुर्गा भट्ट**, **जावेद आलम**, **नरेश कुमार**, **अजय मोहन**, **गिरीश पैन्यूली**, **गंगा डोगरा**, **शशि पैन्यूली** और **नीता बहुगुणा** सहित कई सदस्यों ने भाग लिया।

यह भव्य रामलीला न केवल **आस्था और परंपरा का प्रतीक** बनी, बल्कि तकनीकी नवाचार के माध्यम से **उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को नए आयाम** देने वाला ऐतिहासिक आयोजन भी सिद्ध हुई।

 

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