नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि रेपो रेट 5.50% पर अपरिवर्तित रहेगा। उपभोक्ताओं को फिलहाल सस्ते कर्ज की राहत नहीं मिल पाएगी।
29 सितंबर से शुरू हुई तीन दिवसीय MPC बैठक का समापन 1 अक्टूबर को हुआ। बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि केंद्रीय बैंक अभी मौद्रिक सख्ती के रुख में कोई बदलाव नहीं करेगा।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रम सामने आए हैं। हालांकि, मुद्रास्फीति के मोर्चे पर राहत मिली है।
मुद्रास्फीति पर गवर्नर का बयान
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि हाल के महीनों में मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। मुख्य मुद्रास्फीति जून में 3.7% से घटकर अगस्त में 3.1% पर आ गई थी। ताजा आंकड़ों के मुताबिक इसे और कम करके 2.6% कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अगर यह रुझान जारी रहता है तो आने वाले समय में दरों की समीक्षा की जा सकती है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल नीतिगत दरों को स्थिर रखना ही बेहतर है।
उपभोक्ताओं और बाजार पर असर
RBI के इस फैसले से साफ है कि होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में तत्काल कोई राहत नहीं मिलेगी। बैंकों के लिए रेपो रेट के स्थिर रहने का मतलब है कि वे कर्ज की दरों में बदलाव करने से बचेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति पर काबू पाने के बाद अगले तिमाही में RBI ब्याज दरों को लेकर नरमी दिखा सकता है। तब तक उपभोक्ताओं को इंतजार करना होगा।
आरबीआई का यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। शेयर बाजार ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और प्रमुख सूचकांकों में मामूली बढ़त देखी गई।