सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। भारत सरकार भूटान के साथ, खासतौर पर असम और पश्चिम बंगाल के रेल संपर्क प्रगाढ़ करने की दिशा में अहम कदम उठा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस सिलसिले में विस्तार से जानकारी दी है। केंद्रीय मंत्री ने भारत और भूटान के बीच नई रेल कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर एक विशेष ब्रीफिंग में यह जानकारी दी है। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को मज़बूत करने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। इस घोषणा में उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख सीमा पार रेल पहलों का विवरण पेश किया।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी आगामी परियोजनाओं के विज़न, कार्यान्वयन रणनीति और महत्व पर संयुक्त रूप से प्रकाश डाला।
इस परियोजना के तहत दो प्रमुख लिंक को चिह्नित किया गया है, जिसमें असम को भूटान के गेलेफू से जोड़ने वाली 69 किलोमीटर लंबी कोकराझाड़-गेलेफू लाइन और पश्चिम बंगाल को भूटान से जोड़ने वाली 20 किलोमीटर लंबी बानरहाट-समसे लाइन है। कुल मिलाकर, 4,033 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली ये परियोजनाएँ व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा देगी। समसे और गेलेफू भूटान में प्रमुख आयात-निर्यात केंद्र हैं और 700 किलोमीटर लंबी भारत-भूटान सीमा को सेवा देते हैं। भूटान सरकार द्वारा गेलेफू को माइंडफुलनेस सिटी और समसे को एक औद्योगिक शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
तेज निष्पादन के लिए, कोकराझाड़-गेलेफू लाइन को एक विशेष रेल परियोजना घोषित किया गया है, जिससे मंज़ूरी और भूमि अधिग्रहण में तेज़ी आएगी। वित्तीय पक्ष की बात करें तो, रेल मंत्रालय भारतीय पक्ष के कार्यों के लिए निवेश वहन करेगा, जबकि भारत सरकार, विदेश मंत्रालय के माध्यम से, भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भूटान वाले हिस्से को सहायता प्रदान करेगी। यह मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि बुनियादी ढाँचे का अधिकतम हिस्सा भारत में हो, साथ ही भूटान की विकास आवश्यकताओं को पूरा सहयोग भी प्रदान किया जाए।
भारत, भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और ये रेल परियोजनाएँ संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देते हुए आर्थिक संबंधों को और अधिक मज़बूत करेंगी। भूटान, भारतीय बंदरगाहों के साथ निर्बाध संपर्क के लिए व्यापक भारतीय रेल नेटवर्क का लाभ उठा सकेगा, जिससे माल का कुशल निर्यात और आयात सुगम होगा, व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ेगा और आर्थिक विकास में वृद्धि होगी। हिमालय की तलहटी में न्यूनतम पारिस्थितिक व्यवधान सुनिश्चित करने के लिए योजना स्तर पर पर्यावरणीय पहलुओं को भी एकीकृत किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नई रेल लाइनों के लिए कोच भारत में ही बनाए जाएँगे, जो मेक इन इंडिया की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते है और बुनियादी ढाँचे के विकास में भूटान के सबसे करीबी साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया है कि ये नई परियोजनाएँ भौतिक संपर्क से कहीं आगे बढ़कर भारत और भूटान के बीच स्थायी मैत्री को दर्शाते हैं, जो भारत के “नेवरहुड फर्स्ट” और “एक्ट ईस्ट” नीतियों के अनुरूप हैं। एक बार चालू हो जाने पर, ये लाइनें सुगम्यता में सुधार करेंगी, संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देंगी, रोजगार के अवसर सृजन होंगे और भारत-भूटान सहयोग में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।