दुर्गा पूजा से पहले जलमग्न कोलकाता, अब तक 11 मौतें और खतरे के नए संकेत

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और आसपास के जिलों में हुई भीषण बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। सोमवार रात से लेकर मंगलवार दोपहर तक हुई इस भारी वर्षा ने शहर की रफ्तार रोक दी। हालांकि गुरुवार तक हालात धीरे-धीरे सामान्य हो गए, लेकिन अब तक बारिश से जुड़े हादसों में 11 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 9 लोगों की मौत करंट लगने से हुई, जबकि दो अन्य की मौत दक्षिण 24 परगना और आसपास के जिलों में दर्ज की गई।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे से भी कम समय में कोलकाता में 251.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह पिछले 137 वर्षों में छठा सबसे बड़ा रिकॉर्ड है और 1986 के बाद पहली बार इतनी अधिक वर्षा हुई। पानी भरने से कई मुख्य सड़कें नदी जैसी दिखने लगीं और पाटुली, संतोषपुर, बालीगंज, साल्ट लेक और बिधाननगर जैसे इलाकों में बुधवार रात तक जलजमाव बना रहा।

सबसे बड़ी चिंता दुर्गा पूजा से पहले की तैयारियों को लेकर है। कई पूजा पंडाल अब भी पानी में डूबे हुए हैं, जबकि महोत्सव शुरू होने में केवल दो दिन शेष हैं। प्रशासन के लिए सबसे अहम चुनौती त्योहार से पहले सामान्य स्थिति बहाल करना है।

बारिश ने हवाई, रेल, सड़क और मेट्रो सेवाओं पर भी गहरा असर डाला। कई स्कूल और कॉलेजों को बंद करना पड़ा और सरकार को दुर्गा पूजा की छुट्टियां पहले घोषित करनी पड़ीं।

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है। हालांकि, शनिवार और रविवार यानी षष्ठी के आसपास दक्षिण बंगाल में फिर से भारी से अति भारी वर्षा का अनुमान है, क्योंकि एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।

शहरवासी फिलहाल राहत की सांस ले रहे हैं, लेकिन आगामी त्योहारों और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए चिंता भी बनी हुई है।

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