असम सरकार का असाधारण फैसला: जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मौत के बाद श्यामकानू महंत पर पूर्ण प्रतिबंध, केंद्र से भी अनुरोध
सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की सिंगापुर में संदिग्ध मौत के मामलेमें राज्य सरकार ने एक असाधारण और सख्त फैसला लिया है। घटना के चार दिन बाद असम सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (NEIF) के मुख्य आयोजक श्यामकानू महंत और उनसे सभी जुड़ी संस्थाओं पर राज्य में पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर इसकी आधिकारिक घोषणा की, जिसमें कहा गया कि महंत और उनकी संस्थाओं को असम में किसी भी प्रकार का आयोजन, उत्सव या कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। साथ ही, राज्य सरकार किसी भी ऐसे इवेंट को वित्तीय अनुदान, विज्ञापन या प्रायोजन नहीं देगी, जिसमें महंत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हों।
मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा, “राज्य सरकार ने श्यामकानू महंत और उनके साथ जुड़ी किसी भी संस्था को असम के अंदर किसी भी प्रकार के आयोजन या उत्सव आयोजित करने पर पूर्ण निषेधाज्ञा लगा दी है। इसके अलावा, राज्य सरकार उनके साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े किसी भी आयोजन को कोई वित्तीय अनुदान, विज्ञापन या प्रायोजन नहीं देगी। साथ ही, हम केंद्र सरकार से अनुरोध करेंगे कि उन्हें किसी भी प्रकार का वित्तीय सहायता या प्रायोजन न दिया जाये।” यह घोषणा जुबीन गर्ग की मौत की जांच के बीच आई है, जहां महंत पर लापरवाही और शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं।
जुबीन गर्ग की मौत: हादसा या साजिश?
जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में कथित स्कूबा डाइविंग हादसे में निधन हो गया था। 52 वर्षीय गायक नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने सिंगापुर पहुंचे थे, लेकिन इवेंट से एक दिन पहले वे साथी कलाकारों के साथ समुद्र में तैरने गये। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुबीन बिना लाइफ जैकेट के पानी में उतरे और बेहोश होकर डूब गये। सिंगापुर पुलिस ने प्रारंभिक जांच में डूबने को मौत का कारण बताया, लेकिन असम में जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
सोशल मीडिया पर वायरल आखिरी वीडियो में जुबीन को पानी में तैरते हुए दिखाया गया, जहां वे अचानक बेहोश हो जाते हैं। इससे सवाल उठे कि क्या यह महज हादसा था या लापरवाही से उपजी साजिश? असम सरकार ने जनता की मांग पर जुबीन के शव पर दूसरा पोस्टमॉर्टम कराय है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “सिंगापुर में जांच चल रही है, लेकिन असम पुलिस सीआईडी के माध्यम से सभी पहलुओं की गहन जांच करेगी। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जायेगा।”
श्यामकानू महंत पर आरोपों की बौछार
महंत, जो असम के एक प्रमुख इवेंट आयोजक हैं, पर जुबीन के साथ वर्षों से भावनात्मक शोषण और आर्थिक ठगी के आरोप लगे हैं। उन्हें “जुबीन की धीमी हत्या का जिम्मेदार” तक ठहराया गया है। आरोप है कि महंत ने पिछले 10-12 वर्षों में जुबीन को ‘रंगाली’ और ‘नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल’ जैसे इवेंट्स के नाम पर भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल किया। जुबीन को कभी उचित भुगतान नहीं मिला, केवल यात्रा भत्ता दिया जाता था। एक बार तो दिल्ली इवेंट में जुबीन को अपने संगीतकारों का खर्च खुद वहन करना पड़ा।
मोरीगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज पहली एफआईआर में महंत और जुबीन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा पर लापरवाही का आरोप लगाया गया। अब तक असम के विभिन्न जिलों में 54 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। सीआईडी ने जांच अपने हाथ में ले ली है और महंत की दिल्ली में गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। जुबीन की पत्नी गरिमा सैकिया ने मैनेजर शर्मा के खिलाफ आरोप वापस लेने की अपील की, लेकिन सीएम सरमा ने कहा, “हम गरिमा के दुख का सम्मान करते हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।”
जुबीन गर्ग की मौत पर असम सरकार ने 20 से 22 सितंबर तक तीन दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया। गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में उनके पार्थिव शरीर को रखा गया, जहां लाखों प्रशंसक श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सीएम सरमा खुद दिल्ली से शव लाये और अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
जुबीन ने 40 भाषाओं में 38,000 से अधिक गीत गाये, जिनमें बॉलीवुड का ‘या अली’ जैसा सुपर हिट शामिल हैं। असम के लोग आज भी उनके गीतों से जुड़े हैं, लेकिन यह घटना पूरे संगीत जगत के लिए चेतावनी है कि कलाकारों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।