देवी उर्वशी और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा, दुर्गासप्तशती पाठ शुरू

श्री बदरीनाथ धाम। अश्विन शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर सोमवार को श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ हुआ। प्रातः अभिजीत मुहूर्त में आचार्यों द्वारा कलश (घट) स्थापना की गई। पवित्र अलकनंदा से जल लाकर मंदिर परिसर में कलश स्थापित किया गया। इसके साथ ही माता लक्ष्मी, देवी उर्वशी तथा दुर्गासप्तशती पाठ का शुभारंभ हुआ, जो महानवमी तक चलेगा।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में तीर्थयात्री उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना और देवी पूजन के समय दर्शन किए और माता दुर्गा, माता लक्ष्मी एवं देवी उर्वशी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

हर वर्ष नवरात्रि के अवसर पर बदरीनाथ धाम में नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा रही है। यहां देवी उर्वशी का शक्तिपीठ भी स्थित है। मान्यता है कि भगवान नारायण ने मेनका के दंभ को समाप्त करने के लिए उर्वशी को प्रकट किया था, जिसके बाद से वह श्री बदरीनाथ धाम में निवास करती हैं। यही कारण है कि माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के साथ-साथ देवी उर्वशी की भी विशेष आराधना की जाती है।

रविवार शाम को मंदिर परिसर में भव्य नवरात्रि पूजा पंडाल सजाया गया। सोमवार सुबह आचार्य विजय प्रसाद पांडेय, आशीष उनियाल और राजेंद्र तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से घट स्थापना कर पूजा संपन्न की।

इस अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने श्रद्धालुओं को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं। वहीं बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि नवरात्रि का श्री बदरीनाथ धाम में विशेष महत्व है क्योंकि यहां माता लक्ष्मी और देवी उर्वशी दोनों का निवास माना जाता है।

नवरात्रि घटस्थापना पूजन में विशिष्ट अतिथि अनिल थपलियाल, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, उमेश सती, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट, प्रभारी मंदिर अधिकारी राजेंद्र सेमवाल, मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ सहित बीकेटीसी पदाधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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