13 साल से खाली लोकायुक्त पद पर गरिमा दसौनी का हमला, भाजपा सरकार से पूछे तीखे सवाल

देहरादून। Garima Mehra Dasauni ने उत्तराखंड में वर्ष 2013 से लोकायुक्त पद खाली पड़े होने को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की असलियत तब सामने आ जाती है, जब उसे एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच संस्था की नियुक्ति करने में 13 साल लग जाते हैं।

गरिमा दसौनी ने कहा कि Uttarakhand High Court को बार-बार राज्य सरकार को फटकार लगानी पड़ रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन भी न्यायालय के दबाव के बिना नहीं कर पा रही है। यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर होती, तो लोकायुक्त की नियुक्ति वर्षों पहले हो चुकी होती।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से मजबूत और स्वतंत्र लोकायुक्त संस्था की पक्षधर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने भी लोकायुक्त को मजबूत करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए थे। गरिमा ने दावा किया कि हरीश रावत सरकार के दौरान लोकायुक्त गठन की फाइल दो बार राजभवन भेजी गई, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से उसे वापस लौटा दिया गया।

गरिमा दसौनी ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि यदि उसकी नीयत साफ है तो लोकायुक्त की नियुक्ति में लगातार देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि सर्च कमेटी की बैठक तक समय पर नहीं हो पा रही और बार-बार अदालत से समय मांगा जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार जवाब देने से बच रही है।

उन्होंने राज्य में भर्ती घोटाले, भूमि घोटाले और खनन अनियमितताओं जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि एक स्वतंत्र लोकायुक्त सक्रिय होता तो इन मामलों की निष्पक्ष जांच संभव हो पाती।

गरिमा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकायुक्त संस्था के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन नियुक्ति अब तक नहीं की गई। उन्होंने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग और सरकार की प्रशासनिक विफलता बताया।

कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार तत्काल लोकायुक्त की नियुक्ति करे और प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए।

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