प्रकृति और उन्नत तकनीक के बीच एक अनूठे संबंध को किया उजागर
क्वांटम मैकेनिक्स के उपयोग से इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार का चुंबकीय क्षेत्र में अध्ययन
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को मिलेगी नई दिशा
गुवाहाटी। श की मुख्य धारा से लगभग दो हजार किमी दूर स्थित नगालैंड जैसे छोटे से राज्य से वैश्विक स्तर पर प्रेरणादायक एक संदेश मिला है, जो विज्ञान-तकनीक और राष्ट्रीय गौरव को एकाकार करती महसूस होती है। एक बार फिर यह अवसर राज्य के एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय “नगालैंड यूनिवर्सिटी, लुमामी” ने दिया है। उसके शोधकर्ताओं ने क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. बिप्लब पाल ने प्रकृति में पाए जाने वाले जटिल फ्रैक्टल पैटर्न्स—जैसे बर्फ के टुकड़े, पेड़ की शाखाएँ और न्यूरॉन नेटवर्क—को क्वांटम दुनिया में दोहराने में सफलता प्राप्त की है।
शोध की विशेषता
डॉ. पाल का यह शोध क्वांटम उपकरणों और एल्गोरिदम के लिए नए रास्ते खोलता है। इसके प्रमुख निष्कर्ष हैं:
क्वांटम उपकरण: फ्रैक्टल-आधारित नैनोइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डिज़ाइन।
क्वांटम सूचना प्रसंस्करण: इलेक्ट्रॉन अवस्थाओं पर बेहतर नियंत्रण, जो भविष्य की कंप्यूटिंग के लिए उपयोगी हो सकता है।
अहरोनोव-बोहम केजिंग प्रभाव:
फ्रैक्टल ज्यामिति में इलेक्ट्रॉनों को कैद करने की तकनीक, जो क्वांटम मेमोरी और लॉजिक उपकरणों में उपयोगी हो सकती है।
प्रकृति से प्रेरणा:
फ्रैक्टल प्रकृति में पाए जाने वाले पैटर्न हैं, जैसे नदियों की शाखाएँ, बिजली की चमक और पौधों की संरचना। डॉ. पाल ने क्वांटम मैकेनिक्स का उपयोग कर इन पैटर्न्स में इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार का चुंबकीय क्षेत्र में अध्ययन किया। यह शोध दर्शाता है कि गैर-क्रिस्टलीय, अनाकार सामग्रियों का उपयोग भी क्वांटम उपकरणों के लिए किया जा सकता है, जिससे भारत और विश्व की क्वांटम नवाचार क्षमता बढ़ेगी।
नगालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जगदीश के. पटनायक ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि “भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन अगली पीढ़ी की तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा शोध प्रकृति से प्रेरित फ्रैक्टल ज्यामिति को क्वांटम सिस्टम में लागू करने का नया मार्ग दिखाता है।”
क्या है इसका महत्व?
यह शोध भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लक्ष्यों को समर्थन देता है और वैश्विक क्वांटम तकनीक दौड़ में भारत की स्थिति को मजबूत करता है। यह न केवल वैज्ञानिक समुदाय, बल्कि युवा पीढ़ी को भी प्रेरित कर सकता है कि छोटे संस्थान भी वैश्विक स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।
यह शोध प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका फिजिका स्टेटस सॉलिडी – रैपिड रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित हुआ है और इसे पत्रिका के नवीनतम अंक के कवर पर स्थान मिला है। यह उपलब्धि नगालैंड विश्वविद्यालय को वैश्विक क्वांटम अनुसंधान में अग्रणी भारतीय संस्थानों में शामिल करती है।