संघ ने भाजपा को क्यों किया फ्री हैंड?

दशहरा के इर्द-गिर्द भाजपा को मिल सकता है नया अध्यक्ष  
मनोज सिन्हा या धर्मेन्द्र प्रधान पर बन सकती है सहमति!

-ममता सिंह, नई दिल्ली।
भारतीय जनता पार्टी को अगला अध्यक्ष जल्द ही मिलने वाला है। मनोज सिन्हा, धर्मेन्द्र प्रधान समेत कई नामों को लेकर अटकलें चल रही हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत के ताजा बयान के बाद यह माना जा रहा है कि भाजपा के नए अध्यक्ष के चयन को लेकर संघ का अब कोई दबाव नहीं है। नए अध्यक्ष को लेकर संघ ने भाजपा को फ्री हैंड कर दिया है। जल्द ही नए अध्यक्ष पर मुहर लग सकती है।

वहीं, भाजपा के लिए उसका नया अध्यक्ष बहुत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उसे ही साल 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी करनी होगी। मालूम हो कि मौजूदा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल करीब दो साल पहले समाप्त होने के बाद उन्हें लगातार एक्सटेंशन मिल रहा था। उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा ने कई अहम चुनावों में जीत हासिल की है।
पहले तो संघ का सर्वेक्षण और फिर अब भागवत का बयानों से साफ है कि  संघ ने अध्यक्ष के मसले पर किनारा कर लिया है। इसके पीछे मुख्य कारण उसके द्वारा बीते दिनों कराए गए सर्वेक्षण को माना जा रहा है। दरअसल, संघ ने छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित कुछ राज्यों में सर्वे कराया था जिसमें चैंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। इस सर्वे का मुख्य बिंदु हिन्दीभाषी राज्यों में भाजपा की जमीनी स्थिति की पड़ताल करना था जिसमें अधिकतर कार्यकर्ताओं ने कहा है कि जब भी चुनाव होंगे, फिर वो लोक सभा के हों या विधानसभा के, वे अवकाश पर चले जाएंगे।

मतलब सर्वे में इस बात का जिक्र है कि भाजपा कार्यकर्ताओं में कहीं न कहीं सत्ता के खिलाफ नाराजगी जरूर है। कार्यकर्ताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि वे पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं लेकिन चुनाव के दौरान अवकाश पर चले जाएंगे। इसका मतलब साफ है कि कार्यकर्ता चुनाव के दौरान अपने वोटरों को बूथ तक पहुंचाने का काम नहीं करेंगे। अब इस मसले को संघ ने गंभीरता से लिया है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संघ के उक्त सर्वे में बिहार भी शामिल है। जहां आगामी अक्टूबर-नवम्बर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

भाजपा निरंतर बिहार पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रही है लेकिन उसे अब तक कामयाबी नहीं मिली है। उक्त सर्वे पर गौर करें तो यह भाजपा के लिए सुखद संकेत नहीं है। दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण दो साल बाद भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन न होना है। इसलिए संघ ने अपना पल्ला झाड़ते हुए भाजपा को राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए फ्री हेंड कर दिया है, ताकि बिहार चुनाव के पहले भाजपा का थिंक टैंक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन कर सके।
अभी हाल में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस ओर इशारा भी किया है। उन्होंने कहा था कि संघ को राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना होता तो वह इतनी देर नहीं करता। इसका मतलब साफ है कि संघ की ओर से नए अध्यक्ष को लेकर अब कोई विवाद या दबाव नहीं है। अब तक डेढ़ दर्जन से ज्यादा दिग्गजों के नामों को लेकर चर्चा हो चुकी है लेकिन किसी भी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई है।

परंतु, यह माना जा रहा है कि संघ की ओर से फ्री हेंड होने के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरी कोशिश में है कि दशहरा के इर्द-गिर्द नए अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाए। ऐसा होने से कम से कम सामने आ रहे विधानसभा चुनाव में अवकाश पर जाने की बात कर रहे भाजपाई ऐसा नहीं करेंगे और पूरे दमखम के साथ चुनाव में भागीदारी करेंगे।
अब सवाल यह है कि भाजपा नया अध्यक्ष किसको बनाएगी। भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा या फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। या फिर पुराने चल रहे नामों में से ही किसी एक को अध्यक्ष चुना जा सकता है। क्योंकि संघ की ओर से किसी तरह का कोई दबाव अब नहीं रहा। इसलिए अब अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगना लगभग तय है।

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