चर्चा में त्रिवेंद्र एवं बलूनी की जोड़ी , दबाव की राजनीति बर्दाश्त नहीं करेगा भाजपा हाईकमान

आशीष सिंह

 नई दिल्ली/ देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी की जोड़ी आजकल काफी सुर्खियों में है। दोनों ही सांसदों को इस बात की चिंता सता रही है कि उत्तराखंड में संगठन को किस तरह से सशक्त किया जाए। चिंता वाजिब भी है।

क्योंकि जब इन वरिष्ठों खासकर त्रिवेंद्र सिंह रावत पर जिम्मेदारी पार्टी की ओर से सौंपी गई थी, उस समय उत्तराखंड के लिए वे ज्यादा कुछ नहीं कर पाए हैं। इसलिए ये ” अवसर” की तलाश ढ़ूंढ़ते रहते हैं। “अवसर ” मिलेगा या नहीं। किसी को नहीं पता। क्योंकि राजनीति में कब क्या होगा,किसी को नहीं मालूम।

महत्वपूर्ण बात यह है कि शनिवार को त्रिवेंद्र सिंह रावत और अनिल बलूनी दोनों ने ही उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी दुष्यंत गौतम का पुष्प गुच्छ देकर जोरदार स्वागत किया। दोनों ने कहा कि दुष्यंत गौतम से संगठन को सशक्त करने के मकसद से चर्चा हुई। यह तो काफी अच्छी बात है कि दोनों संगठन को लेकर चिंतित है और संगठन को ज्यादा से ज्यादा मजबूत करना चाहते हैं। इस क्रम में ही दोनों की मुलाकात दुष्यंत गौतम से हुई है। यह दावा खुद प्रेस रिलीज जारी करके हरिद्वार सांसद की ओर से किया गया है। पॉजिटिव सोंच तो अच्छी बात है।

लेकिन बड़ी विडंबना यह है कि बीते शुक्रवार को उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के आवास पर संगठन को सशक्त बनाने के मकसद से ही एक जरूरी बैठक बुलाई गई थी। उक्त बैठक में उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी दुष्यंत गौतम भी शामिल थे।

महेंद्र भट्ट के आवास पर आयोजित उक्त बैठक से त्रिवेंद्र सिंह रावत 5 मिनट के अंदर ही बाहर निकल गए। राजनीति के जानकार बताते हैं कि संगठन को सशक्त करने तथा महेंद्र भट्ट की नयी टीम कैसी हो, इसको लेकर ही तो बैठक बुलाई गई थी। फिर हरिद्वार सांसद बैठक से बाहर क्यों आए। क्या वजह रही।

इसके अलावा शनिवार को अलग से उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी से विशेष रूप से मुलाकात की घटना से यह बात साफ हो गई है कि इन सांसदों की मंशा क्लीयर नहीं है। यदि वाकई संगठन और प्रदेश के विकास को लेकर चिंता थी तो बैठक में शामिल होकर मजबूती के साथ अपना पक्ष रख सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

अलग से खिचड़ी पकाने से न ही उत्तराखंड और न ही भाजपा का भला होने वाला है। खुद का स्वार्थ त्यागना होगा और प्रदेश को सशक्त बनाने की दिशा में काम करना होगा। दरअसल महेंद्र भट्ट की नई टीम बननी है। सभी दिग्गज अपने -अपने हिसाब से दबाव बनाकर अपने- अपने विश्वासपात्र शिष्यों को महेंद्र भट्ट की टीम में शामिल कराना चाहते हैं।

लेकिन भाजपा हाईकमान सब समझ रहा है। हाईकमान को पता है कि कहां किसे फिट करना है। हां यह बात साबित हो गई है कि पार्टी या प्रदेश के साथ घिनौना मजाक करने वालों को हाईकमान बर्दाश्त कतई नहीं करेगा। संगठन और सरकार का पूरा फीड बैक हाईकमान के पास है। इसलिए हाईकमान सोच समझकर ही महेंद्र भट्ट की टीम को हरी झंडी प्रदान करेगा। हाईकमान किसी के दबाव में नहीं आने वाला है।

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