सुंदरबन टाइगर रिज़र्व (एसटीआर) को आखिरकार 11 साल के लंबे इंतज़ार के बाद बड़ा तोहफ़ा मिला है। नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ ने इसकी सीमा विस्तार को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद सुंदरबन देश का दूसरा सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व बन जाएगा।
अब तक सुंदरबन का टाइगर रिज़र्व क्षेत्रफल 2,585 वर्ग किलोमीटर था। इसमें 1,044 वर्ग किलोमीटर का नया क्षेत्र जोड़ा गया है, जिससे इसका कुल क्षेत्रफल बढ़कर 3,629 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इस विस्तार के बाद सुंदरबन से बड़ा केवल आंध्र प्रदेश का नागार्जुन सागर–श्रीशैलम टाइगर रिज़र्व (3,727 वर्ग किमी) ही रहेगा।
नए फैसले के तहत दक्षिण 24 परगना वन प्रभाग के रायदीघी, रामगंगा और मातला रेंज को सुंदरबन टाइगर रिज़र्व में शामिल किया जाएगा। अब तक रिज़र्व में केवल चार रेंज – राष्ट्रीय उद्यान (पूर्व व पश्चिम), सजनखाली और बसीरहाट – ही आते थे। नए जोड़े गए क्षेत्र को फिलहाल “बफर ज़ोन” घोषित किया गया है।
वन विभाग के अनुसार, इन तीन रेंजों में पहले से ही बाघ मौजूद हैं। इन्हें मिलाकर अब सुंदरबन में बाघों की संख्या 101 हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विस्तार से वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर संरक्षण संभव होगा।
राज्य सरकार जल्द तय करेगी कि नए क्षेत्र का कितना हिस्सा कोर ज़ोन और कितना बफर ज़ोन होगा। अधिसूचना जारी होने के बाद सुंदरबन टाइगर रिज़र्व नए स्वरूप में आधिकारिक रूप से सामने आएगा।
वनकर्मियों को अब विशेष प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और कानून संबंधी जानकारी दी जाएगी। उन्हें जोखिम भत्ता भी मिलेगा, जैसा कि अन्य टाइगर रिज़र्व के कर्मचारियों को मिलता है। साथ ही, पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आएगी।
पूर्व प्रधान वन अधिकारी प्रदीप व्यास ने इसे “बाघ संरक्षण का स्वप्न पूरा होने” जैसा बताया। वहीं विशेषज्ञ जयदीप कुंडू ने चेताया कि अब सुंदरबन के सभी बाघ राष्ट्रीय संरक्षण प्रोटोकॉल के दायरे में आ जाएंगे, इसलिए राज्य और केंद्र सरकार दोनों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।