गढ़वाल में आपदा राहत के लिए सांसद बलूनी ने दिए 35 लाख, जानिए किन गांवों को मिलेगा फायदा

पौड़ी गढ़वाल जिले में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने कई गांवों को गहरे संकट में डाल दिया है। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक और राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा जब इन आपदा प्रभावित क्षेत्रों की गंभीर स्थिति से गढ़वाल सांसद अनिल बलूनीको अवगत कराया गया, तो सांसद बलूनी ने त्वरित निर्णय लेते हुए 35 लाख रुपये की सहायता राशि मंजूर की है।

यह राशिसांसद निधि से स्वीकृतकी गई है और इसका उपयोग विशेष रूप से पावों, खिर्सू और थलीसैंण विकासखंड के उन गांवों में किया जाएगा जो हालिया आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस धनराशि से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें, पुल, सिंचाई नालियों और अन्य आवश्यक बुनियादी ढाँचोंके  पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्यों में तेजी लाई जाएगी, जिससे ग्रामीण जनता को सीधा लाभमिल सके।

सांसद बलूनी का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इन गांवों में लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाएं ठप पड़ी हैं। राहत कार्यों को गति देने के लिए उनकी यह आर्थिक मदद क्षेत्रीय जनता के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

केंद्रीय स्तर पर भी उठा चुके हैं आवाज

गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी न केवल स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि दिल्ली में भी लगातार उत्तराखंड की समस्याओं को प्रमुखता से उठा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी से भेंट की और आपदा से क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय राजमार्गों के पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने गडकरी से अनुरोध किया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में आपदा के बाद सड़कों का जल्दी पुनर्निर्माण अत्यंत आवश्यक है, ताकि राहत व पुनर्वास के कार्य तेजी से हो सकें।

नेताओं ने जताया आभार

सांसद बलूनी की इस सहानुभूतिपूर्ण और त्वरित पहल पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, भाजपा पौड़ी जिला अध्यक्ष कमल किशोर रावत, पाबों मंडल अध्यक्ष विमल नेगी, थलीसैंण मंडल अध्यक्ष आनंद नेगी, खिर्सू मंडल अध्यक्ष मीना गैरोला, और भाजपा जिला मीडिया प्रभारी गणेश भट्ट ने संयुक्त रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल प्रभावित परिवारों को राहत देगा, बल्कि गढ़वाल क्षेत्र में पुनर्निर्माण कार्यों को नई गति भी देगा।

सांसद बलूनी की यह पहल बताती है कि जब जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता और तत्परता से काम करते हैं, तो आपदा जैसी कठिन घड़ी में भी लोगों को राहत और भरोसा मिल सकता है।

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