After Header-1

उत्तराखंड में बिना मान्यता वाले मदरसे सील, हाईकोर्ट ने लगाई शिक्षण और नमाज पर रोक

300×250 ADS-1

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में संचालित अवैध मदरसों पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि जब तक किसी मदरसे को विधिवत रूप से सरकारी मान्यता प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक वहां किसी भी प्रकार की धार्मिक, शिक्षण या नमाज संबंधी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की, जो हरिद्वार स्थित कई मदरसों द्वारा दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं में मदरसा जामिया राजबिया फैजुल कुरान, मदरसा दारुल कुरान, नुरूहुदा एजुकेशन ट्रस्ट, सिराजुल कुरान अरबिया रासदिया सोसाइटी और दारुलउलूम सबरिया सिराजिया सोसाइटी शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अपने संस्थानों के पंजीकरण के लिए आवेदन किया हुआ है, लेकिन मदरसा बोर्ड की बैठक न होने के कारण पंजीकरण की प्रक्रिया लंबित है। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए उनके शिक्षण संस्थानों को सील कर दिया है।

300×600 ADS-2

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जिन मदरसों को सील किया गया है, वे पूरी तरह से अवैध रूप से संचालित हो रहे थे। इनमें न केवल बिना अनुमति के धार्मिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं, बल्कि बच्चों को शिक्षा भी दी जा रही थी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकृत और मान्यता प्राप्त मदरसों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है और न ही उनके अनुदान में कोई कटौती की गई है।

सरकारी पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि इन मदरसों का संचालन निजी व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा था, जिनके पास आवश्यक वैधानिक मंजूरी नहीं थी। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत इन्हें सील किया गया है। कोर्ट को बताया गया कि सरकार प्रदेशभर में अतिक्रमण और अवैध रूप से संचालित शिक्षण संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक किसी मदरसे को विधिवत पंजीकरण और मान्यता प्राप्त नहीं हो जाती, वहां किसी भी प्रकार की धार्मिक, शैक्षणिक या नमाज की गतिविधि नहीं होगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.