अदीस अबाबा/न्यूयॉर्क। कोविड-19 महामारी के बाद उत्पन्न हुए वैश्विक खाद्य संकट से दुनिया अब धीरे-धीरे उबरती हुई दिखाई दे रही है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024 में भूख का सामना करने वाले लोगों की संख्या लगातार तीसरे वर्ष में गिरावट पर है। हालांकि, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया जैसे क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और आर्थिक संकट के कारण स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
2024 में 67.3 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे हैं
यूएन की पांच प्रमुख एजेंसियों—FAO (खाद्य एवं कृषि संगठन), IFAD, WFP, WHO और UNICEF—द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई “स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2024” रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में करीब 673 मिलियन (67.3 करोड़) लोग यानी दुनिया की 8.2 प्रतिशत आबादी भूख का सामना कर रही थी। यह आंकड़ा 2023 में 8.5 प्रतिशत था, जो इस वर्ष थोड़ी गिरावट के साथ 8.2 प्रतिशत पर आ गया है।
भारत और दक्षिण अमेरिका की भूमिका अहम
एफएओ के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार, भारत और दक्षिण अमेरिका में खाद्य वितरण प्रणाली में सुधार, सरकारी हस्तक्षेप और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने इस वैश्विक गिरावट में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “कुछ प्रमुख क्षेत्रों में खाद्य पहुंच और पोषण संबंधी कार्यक्रमों के सशक्त क्रियान्वयन के कारण ही वैश्विक स्तर पर भूख के आंकड़ों में यह गिरावट संभव हो पाई है।”
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में हालात अब भी गंभीर
टोरेरो ने हालांकि चेतावनी दी कि यह प्रगति स्थायी नहीं है। उन्होंने कहा कि “जलवायु परिवर्तन, सशस्त्र संघर्ष और बढ़ता ऋण संकट ऐसे कारक हैं जो इन सुधारों को पलट सकते हैं।” उन्होंने इथियोपिया में आयोजित एक संयुक्त राष्ट्र खाद्य सम्मेलन के दौरान कहा कि अगर इन संकटों का समाधान नहीं हुआ तो भूख का ग्राफ दोबारा चढ़ सकता है।
विशेष रूप से अफ्रीका उपमहाद्वीप और पश्चिम एशिया में हालात बदतर हैं। सूडान, सोमालिया, यमन और सीरिया जैसे देशों में आंतरिक संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता के कारण लोगों को भोजन, स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं मिल पा रही है।
गाजा और अन्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों में आंकड़े अधूरे
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सर्वेक्षण लंबे समय से भूख से प्रभावित लोगों पर केंद्रित है। इसमें गाजा, यूक्रेन, अफगानिस्तान और हैती जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों की तात्कालिक मानवीय आपदाओं का पूरा विवरण शामिल नहीं हो सका है। इन क्षेत्रों में भूख और कुपोषण की वास्तविक स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती है।
2030 तक भूखमुक्त दुनिया का लक्ष्य अभी भी दूर
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2030 तक ‘शून्य भूख’ (Zero Hunger) का लक्ष्य तय किया था, लेकिन इस रिपोर्ट के अनुसार यह लक्ष्य अभी भी काफी दूर है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो 2030 तक भी करोड़ों लोग भूख से प्रभावित रहेंगे।
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट वैश्विक खाद्य सुरक्षा में उम्मीद की एक किरण दिखाती है, लेकिन साथ ही यह भी आगाह करती है कि यदि जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और आर्थिक असमानता पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो हालिया सुधार स्थायी नहीं रह पाएंगे। वैश्विक सहयोग, नीति-निर्माण और राहत अभियानों को और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता है, ताकि दुनिया के हर व्यक्ति को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके।