देहरादून। उत्तराखंड में इस समय मॉनसून पूरी तरह सक्रिय है और राज्य के पर्वतीय जिलों में भारी बारिश और भूस्खलन जैसी गंभीर परिस्थितियाँ बनी हुई हैं। इसके बावजूद, श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है। चारधाम यात्रा पूरी रफ्तार से जारी है और अब तक रिकॉर्ड 38,64,333 श्रद्धालु पवित्र धामों के दर्शन कर चुके हैं।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) द्वारा शनिवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक
• बद्रीनाथ में 1,54,276,
• केदारनाथ में 13,46,831,
• गंगोत्री में 5,97,521,
• यमुनोत्री में 10,02,000
• और हेमकुंड साहिब में 2,10,090 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
पिछले शुक्रवार को ही
• बद्रीनाथ में 1,567,
• केदारनाथ में 2,216,
• गंगोत्री में 2,137,
• यमुनोत्री में 1,002
• और गोमुख में 124 तीर्थयात्री पहुंचे।
भारी बारिश और भूस्खलन बना चुनौती, फिर भी उत्साह बरकरार
बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में यात्रा बाधित हुई है। विशेष रूप से अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जो खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। इसके कारण भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने की घटनाएं बढ़ी हैं। SEOC के अनुसार, वर्तमान में राज्य में 23 मार्ग अवरुद्ध हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मार्गों को खोलने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और ऋषिकेश-श्रीनगर-रुद्रप्रयाग मार्ग अब तक सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। प्रशासन ने इन मार्गों पर यातायात नियंत्रण और सुरक्षा की व्यवस्था को मजबूत किया है ताकि यात्रा सुरक्षित बनी रहे।
169 श्रद्धालुओं की यात्रा के दौरान मौत, कई घायल
चारधाम यात्रा के दौरान अब तक 169 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। इनमें से
• 143 की मृत्यु खराब स्वास्थ्य की वजह से,
• 15 की अन्य कारणों से
• और 5 तीर्थयात्री प्राकृतिक आपदा के कारण मारे गए।
इसके अलावा, 5 यात्री घायल हुए हैं जबकि 1 व्यक्ति लापता बताया गया है।
प्रशासन ने बताया कि अधिकतर मौतें हृदयगति रुकने, उच्च रक्तचाप, और ऑक्सीजन की कमी जैसे कारणों से हुईं। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने सभी पड़ावों पर मेडिकल चेकअप की व्यवस्था की है, और तीर्थयात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले अपना स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं।
प्रशासन की अपील: दिशा-निर्देशों का पालन करें, जोखिम न उठाएं
उत्तराखंड प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और खतरनाक या बंद मार्गों पर जाने से बचें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे नदी किनारों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और अंधेरे में यात्रा से परहेज करें।
सरकार द्वारा स्थापित हेल्पलाइन नंबरों और ट्रैवल एप्स के माध्यम से यात्रियों को रूट मैप, मौसम की जानकारी और मार्गों की स्थिति की अद्यतन जानकारी दी जा रही है। राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे यात्रा मार्गों पर पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल, राहत सामग्री, एम्बुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करें।
श्रद्धालुओं का अटल विश्वास, हर कठिनाई पर भारी
चारधाम यात्रा में आस्था की अद्भुत मिसाल देखने को मिल रही है। मौसम और प्राकृतिक विपदाओं के बावजूद देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए लंबी दूरी तय कर रहे हैं। एक तीर्थयात्री ने बताया, “हम जानते हैं कि यहां मौसम खराब है, पर विश्वास और श्रद्धा ही हमें आगे बढ़ा रही है।”
कई श्रद्धालु यात्रा स्थलों पर डटे हुए हैं और लगातार भगवान के जयकारे करते देखे जा सकते हैं। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों द्वारा भी उन्हें भोजन, चिकित्सा और आश्रय की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।