श्रावण मास की पहली बारिश से खिला शिवभक्ति का माहौल

नई दिल्ली। देवों के देव, भगवान शिव की उपासना का पवित्र माह सावन (श्रावण) आज देशभर में हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया है। सावन माह की शुरुआत होते ही देश के तमाम शिवालय और हिन्दू मंदिर भक्तों की आस्था और श्रद्धा से गूंज उठे हैं। इस पावन माह में लोग पवित्र जलधाराओं में डुबकी लगाकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं और ‘हर-हर गंगे’, ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंज रहे हैं।

सावन का माह भारतीय जीवन, संस्कृति और लोक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह माह लोकमंगल की कामना का प्रतीक होने के साथ अन्नोत्पादन का आधार भी माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से भी यह माह अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि इस दौरान भक्त भगवान शिव को विशेष श्रद्धा और भक्ति से पूजते हैं।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में भक्तों की भीड़
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में सावन के पहले दिन शुक्रवार तड़के ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। यहां रुद्राभिषेक जैसे विशेष अनुष्ठान भी संपन्न हुए, जिनमें भगवान शिव को दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिवालय में भक्तगण अपने मनोवांछित फल की कामना करते नजर आए। इस बार सावन माह का समापन नौ अगस्त को होगा।

सावन के धार्मिक महत्व
भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार होता है, इसलिए सावन माह के प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की परंपरा है। इसके अलावा, सावन के सभी मंगलवार भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती को समर्पित होते हैं। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, सावन का महीना बहुत ही महत्व रखता है क्योंकि इसी माह भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान कर सम्पूर्ण ब्रह्मांड को उसके विषाक्त प्रभाव से बचाया था।

उत्तर भारत में श्रद्धालुओं की श्रद्धा
उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश, और उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या सहित राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ नजर आई। चांदनी चौक स्थित श्री गौरीशंकर मंदिर में भी शिवभक्तों की कतार लगी हुई थी। देश के इन प्रमुख तीर्थ स्थलों में भगवान शिव की आराधना का माहौल देखने को मिला।

कांवड़ तीर्थयात्रा का पवित्र आरंभ
सावन के साथ ही कांवड़ तीर्थयात्रा भी शुरू हो गई है। देशभर के हजारों शिवभक्त गंगाजल लेकर दूर-दराज के मंदिरों में जलाभिषेक के लिए निकले हैं। दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर समेत कई स्थानों पर कांवड़ यात्रियों के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हरियाणा में अंबाला-देहरादून सड़क मार्ग को कांवड़ यात्रा के मद्देनजर वन-वे कर दिया गया है ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो।

दिल्ली में भी कांवड़ यात्रियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, जहां से हजारों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री और गोमुख से गंगाजल लेकर लौटेंगे। ये श्रद्धालु 23 जुलाई को आने वाली महाशिवरात्रि पर अपने-अपने शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे।

नोएडा में मार्ग परिवर्तित
नोएडा प्रशासन ने भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए 25 जुलाई तक यातायात मार्गों में परिवर्तन किया है। यह परिवर्तन आज रात 10 बजे से प्रभावी हो जाएगा, जिससे कांवड़ यात्रियों की आवाजाही सुचारु रूप से चल सके।

प्रशासनिक तैयारियां
सरकार ने देशभर में सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा और व्यवस्था कड़ी कर दी है। कई राज्यों में पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात की गई हैं। यात्रियों से भी अपील की गई है कि वे कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सतर्कता से यात्रा करें।

सावन: एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व
सावन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के त्योहारों में से एक उल्लासमय माह भी है। इस माह में अनेक लोक गीत, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं जो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह भर देते हैं।

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