6 साल बाद फिर शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा: जानिए इससे जुड़ी खास बातें

शिव भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी

करीब छह साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर शुरू हो गई है। आज यानी 30 जून 2025 से इस पवित्र यात्रा की शुरुआत हो चुकी है, जिससे शिव भक्तों में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है। कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर तनाव के कारण यह यात्रा 2020 से स्थगित थी, लेकिन इस वर्ष दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के बाद यात्रा को पुनः हरी झंडी दे दी गई है।

कहाँ है कैलाश मानसरोवर?
कैलाश मानसरोवर चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है और यह स्थान हिंदू, बौद्ध, जैन और तिब्बती बोंपो धर्मों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है, और इसके पास स्थित मानसरोवर झील को अत्यंत पवित्र जलाशय के रूप में पूजा जाता है।

मानसरोवर झील की विशेषताएं
मानसरोवर झील समुद्र तल से करीब 15,100 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह मीठे पानी की झील है, और इसे ब्रह्मा के ‘मन’ से उत्पन्न कहा जाता है, इसीलिए इसे “मानसरोवर” कहा जाता है। यह झील न केवल धार्मिक रूप से बल्कि भौगोलिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से चार प्रमुख नदियाँ—सरयू, सतलुज, सिंधु और ब्रह्मपुत्र—उत्पन्न होती हैं।

कब होती है यात्रा और कैसे करें आवेदन?
विदेश मंत्रालय हर साल जून से सितंबर के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करता है। इस वर्ष भी यही समय सीमा रखी गई है। यात्री दो रूट में से किसी एक को चुन सकते हैं:

लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) के माध्यम से

नाथू ला दर्रा (सिक्किम) के माध्यम से

इन दोनों मार्गों के माध्यम से तीर्थयात्री चीन के तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। चयन मेडिकल जांच और लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से होता है।

यात्रा की कठिनाइयाँ और तैयारियाँ
कैलाश मानसरोवर यात्रा आसान नहीं मानी जाती। तीर्थयात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र में ट्रैकिंग करनी होती है, जहाँ ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य से काफी कम होती है। इसलिए विदेश मंत्रालय केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से तैयार लोगों को ही यात्रा की अनुमति देता है। यात्रा से पहले विस्तृत मेडिकल जांच अनिवार्य होती है।

यात्रा में औसतन 20-25 दिन लगते हैं, जिसमें acclimatization (ऊँचाई के अनुसार शरीर को ढालना) के लिए भी पर्याप्त समय रखा जाता है। मौसम की अनिश्चितता और ऊंचाई की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यात्रियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित गाइड्स और सहायता टीम के साथ यात्रा करनी होती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
कैलाश पर्वत न केवल हिंदुओं के लिए भगवान शिव का निवास स्थान है, बल्कि बौद्ध धर्म में इसे “कांग रिनपोछे” कहा जाता है और इसे बुद्धों का पवित्र स्थल माना जाता है। जैन धर्म में इसे ऋषभदेव जी की मोक्षस्थली माना गया है। तिब्बती बोंपो धर्म के अनुसार भी यह स्थल अत्यंत पवित्र है। चारों धर्मों के अनुयायी इस पर्वत की परिक्रमा (कैलाश परिक्रमा) करते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से अति पुण्यकारी मानी जाती है।

इस बार यात्रा में क्या है नया?
इस बार की यात्रा में सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं। साथ ही, यात्रियों के लिए डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई है ताकि ऊँचाई और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में त्वरित सहायता दी जा सके। भारत-चीन सीमा पर हालिया समझौतों के चलते यात्रियों के प्रवेश और मार्ग को अधिक सुविधाजनक बनाया गया है।

निष्कर्ष
कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा और प्रकृति से जुड़ने का एक अत्यंत आध्यात्मिक अनुभव है। छह साल के लंबे अंतराल के बाद इसका फिर से आरंभ होना न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि भारत-चीन सांस्कृतिक संबंधों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। यदि आप इस वर्ष यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो समय पर आवेदन करें और पूरी तैयारी के साथ इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनें।

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