टिहरी बांध की झील के कारण सैकड़ों लोगों का जीवन खतरे में

नई टिहरी। टिहरी बांध की झील का जलस्तर घटने और बढ़ने से ग्राम पिपोला खास में कई घरो मे दरार बढ़ने से लोग चिंता मे है । पिछले कई वर्षो से अधिक गांव के घरों में लगातार दरार आ रही है।
एशिया के सबसे बडे़ बांध टिहरी बांध की 42वर्ग किलोमीटर की झील के जलस्तर के बढ़ने घटने से ऊपरी ढालो पर बसे कई गांव खतरे की जद मे है।

लेकिन ग्रामीणों की समस्या बढ़ गई

मदननेगी सहित एक दर्जन से अधिक गांव अस्थिर होने लगें है। लोगो के घरों में आई दरारे बढ़ती ही जा रही है। विगत वर्षो में राज्य सरकार ने जब बांध निर्माण कंपनी को रिजर्वायर (झील)का जल स्तर आर एल 820मीटर से 830मीटर तक भरने की अनुमती दी थी। जलस्तर 830मीटर से अधिक तक भर गया था इससे सरकार को धनलाभ जरूर हुआ । लेकिन ग्रामीणो की समस्या बढ़ गई । इस झील से प्रभावित आङ्क्षशक डूब क्षेत्र के ग्रामों/परिवारों की प्रत्येक साल बढ़ रही है लेकिन सरकार इनके विस्थापन करने मे लगातार असफल रही है जिससे झील के उपर बसे सैकड़ो परिवार लगातार खतरे के जद मे जीवन जी रहे है । जिनका विस्थापन होना अभी बाकी है ।

टिहरी बॉध की झील के कारण विस्थापन हुये गांव जो 835 मी.तक स्थित है उन गांव को पुनर्वास करने के लिए सरकार ने पुनर्वास नीति 1998 बनाई थीं जो केवल 835मीटर उचांई तक स्थित गांव के लोगों लिए ही थी, सिंह केतु झील का जलस्तर बढ़ने से 835 मी. से ऊपर के लिए कोई नीति नहीं थी । सुप्रीम कोर्ट ने एन डी जयाल बनाम भारत संघ व किशोर उपाध्याय व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य की याचिका पर केंद्र, राज्य और केंद्र को यह आदेश दिया कि 835मी. से ऊपर के प्रभावित ग्रामों,परिवारों के लिए एक नई पुनर्वास नीति बनाई जाए । तब केंद्र, राज्य और टीएचडीसी ने मिलकर नई पुनर्वास नीति सम्पाॢवक क्षति पूॢत नीति 2013 बनाई, जिसे 2021में सशोधित किया गया।
इस नई नीति से वे ही ग्राम परिवार विस्थापित होंगे, जिन्हें संयुक्त विशेषज्ञ समिति अपनी संस्तुति देगी । हर छमाही में इन ग्रामों का निरीक्षण करने के भी आदेश दिये गये थे, ताकी हर छमाही में वे अपनी रिपोर्ट दे सके। ग्राम पिपोला खास के एक भू भाग सावित्री सैन नामे तोक को
भूवैज्ञानिको ने यह कह कर संस्तुति दी की ग्राउंड मूमेंट के कारण यह भूभाग संवेदनशील है, और यहां पर रहने वालो को विस्थापित किया जाय । सिंहकतु भूवैज्ञानिको के द्वारा विस्थापन के लिए संस्तुति किये जाने के बाद भी ग्राम वासियों के मकान जहां है उन पर लगातार दूसरे बढऩे का सिलसिला बढ़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों को विस्थापित करने का कोई फरमान सरकार से नही आया है ।
ग्राम पिपोला खास में पहले हल्की दरार आई फिर यह धीरे-धीरे बड़ी हो गई, आगे और भी खतरनाक स्थिति हो सकती है । इसलिए समय रहते ग्राम पिपोला खास को पूर्ण रूप से विस्थापित नही किया गया तो खतरे की जद मे रहते हुये यहां पर कभी भी विस्फोटक स्थिति खड़ी हो सकती है ।यही स्थिति रौलाकोट सहित एक दर्जन से अधिक गांव की है जहां पर स्थित भवनों पर झील के कारण दबाव बढऩे से मकानो मे लगातार दरारे पड़ने का सिलसिला जारी है।

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