महिला कांग्रेस कार्यकर्ता गुपचुप ढंग से जा पहुंची मुख्यमंत्री आवास

देहरादून। महिलाओं को नौकरी में 30 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगाने के  विरोध में प्रदेश महिला कांग्रेस कार्यकर्ता गुपचुप ढंग से मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गई।

मुख्यमंत्री आवास के बाहर जैसे ही महिलाओं ने नारेबाजी शुरू की वैसी ही ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के होश फाख्ता हो गए। सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन लेकर चला गया जहां सभी महिलाओं को बाद में छोड़ दिया गया।
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती ज्योति रौतेला के नेतृत्व में महिला कांग्रेस नेत्रियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। हैरत की बात यह है कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के बावजूद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने की भनक नहीं लगी।

जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर नारेबाजी आरंभ कर दी तब जाकर पुलिस की नींद खुली। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने राज्य सरकार पर अदालत में कमजोर पैरवी करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिलाओं को नौकरी में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण के मसले की सरकार ने  हाईकोर्ट में ठीक से पैरवी नहीं की है । यही वजह है कि महिला आरक्षण पर रोक लगी है।

महिलाओं को इसका लाभ मिलता रहे इसके लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट जाए या फिर इसके लिए अध्यादेश लाए। महिलाएं मजबूती से आगे बढ़े इसके लिए उन्हें नौकरी में आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओन ने चुनौतियों का मुकाबला कर जन आंदोलनों को मुकाम तक पहुंचाया। बात चाहे स्वतंत्रता आंदोलन की हो या राज्य गठन के आंदोलन की। महिलाओं ने अपने संघर्ष से इन आंदोलन को कामयाबी दिलाता है।

इसके अलावा प्रदेश में पेड़ को काटने को रोकने के लिए चिपको आंदोलन और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ भी महिलाओं ने आवाज को बुलंद किया। उत्तराखंडी महिलाएं अपने सीमित दायरे और सामाजिक रूढ़िवादिता के बावजूद हर समस्या के समाधान के लिए लडाई लडने में अग्रिम पंक्ति में रही हैं। उन्होंने अपने आंचल को हमेशा ही इंकलाब परचम बना दिया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को देखा जाए तो उत्तराखंड की नारियों ने इस आंदोलन में अहम भूमिका निभाई है। 1930 में नमक सत्याग्रह व पेशावर कांड की घटनाओं ने पहाड़ की महिलाओं को सामूहिक रूप से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन के लिए प्रेरित किया।
इसके अलावा उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महिलाओं की अहम भूमिका रही है। 1914 में उत्तराखंड की महिलाओं ने अलग राज्य की मांग को लेकर सड़कों पर उतर कर आंदोलन किया। उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में जितना योगदान यहां के पुरुष वर्ग ने दिया उससे कई गुना अधिक योगदान यहां की महिलाओं ने दिया।

इस आंदोलन के दौरान घटित मुजफ्फरनगर कांड महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की याद दिलाता है। पृथक राज्य के लिए  सन 1994 के वर्ष  उत्तराखंड की मातृशक्ति ने घर-बार चूल्हा-चौका छोड़ हाथों में दरांती लिए सड़कों पर उतर आई थी।

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