कलियुगी पुत्र की फांसी की सजा मामले में निर्णय सुरक्षित

नैनीताल।उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कलियुगी पुत्र की फांसी सजा के मामले में सुनवाई पूरी कर ली है और अदालत ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है। घटना दो साल पहले सात अक्टूबर, 2019 की है।

उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर से सटे चोरगलिया के उदयपुर रैक्वाल क्वीरा फार्म निवासी सोबन सिंह के कलियुगी पुत्र डिगर सिंह ने मामूली विवाद में अपनी मां जौमती देवी की दर्राती से गला काटकर निर्ममपूर्वक हत्या कर दी थी।

सोबन सिंह ने हत्या का आरोप अपने पुत्र डिगर सिंह पर मढ़ा था और उसके खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया था।  आरोप लगाया गया कि मामूली से विवाद में आरोपी दर्राती से अपनी मां के गले पर कई वार किये और सिर को धड़ से अलग कर दिया।

इससे मौके पर ही उसकी मौत हो गयी। अपर जिला न्यायाधीश ने इस घटना को जघन्य मानते हुए आरोपी को अलग-अलग धाराओं में फांसी और आजीवन कारावास की सजा सुनायी। साथ ही फांसी की सजा को पुष्टि के लिये उच्च न्यायालय भेज दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एनएस धनिक की युगलपीठ में गुरूवार को फांसी की सजा पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से इस मामले में कई दलीलें दी गयीं। अंत में पीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया।

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