अल्मोड़ा । जागेश्वर को छोड़कर अन्य जिले की पांच सीटों पर दस निर्दलीय प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। विस चुनाव लड़ रहे सभी निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित हो चुके हैं।
किसी के पाले में बल्लेबाज, माइक व ब्लैक बोर्ड चुनाव चिन्ह के रूप में मिला है। कोई फलों की टोकरी, बैटरी व टॉर्च लेकर चल पड़ा है, तो कोई केतली, बाल्टी, गैस सिलेंडर व पानी का टैंक लेकर चुनावी रणभूमि में कूदा है।
विस चुनाव 2022 के लिए नामांकन, जांच व नाम वापसी तक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित हो चुके हैं। भले ही बड़े दलों को अपना चुनाव चिन्ह लोगों तक पहुंचाने में बड़ी माथापच्ची नहीं करनी पड$ती है, क्योंकि उनके चिन्ह पूर्व से ही प्रचलित हैं।
सर्वाधिक दिक्कत निर्दलीय व क्षेत्रीय संगठनों के प्रत्याशियों को होती है। उन्हें नये-नये चिन्ह प्रदान किए जाते हैं और इन चिन्हों को वोटरों के दिलों-दिमाम में सेट करना उनके लिए मुश्किल होती है। फिर भी नाम वापसी की प्रक्रिया के साथ मिले चिन्हों को लेकर प्रत्याशी वोटरों तक पहुंचने की जद्दोजहद में जुट गए हैं।
कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा, भाजपा का कमल का फूल, बसपा का हाथी, सपा की साइकिल, आम आदमी पार्टी का झाड़ू तथा उक्रांद का चुनाव चिन्ह कुर्सी से आमजन पहले से ही परिचित हैं, लेकिन कुछ संगठनों के प्रत्याशियों व निर्दलियों को नये चुनाव चिन्ह आंवटित हुए हैं।
इनमें उत्तराखंड परिवर्तन पाटी का चुनाव चिन्ह कैंची है। जिले की द्वाराहाट सीट पर सबसे अधिक दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे हैं। जिसमें से तीन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
इधर अल्मोड़ा, सल्ट एवं सोमेश्वर सीट से दो-दो निर्दलीय प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सल्ट से भी दो निर्दलीय सीट पर संघर्ष कर रहे हैं। जबकि, रानीखेत सीट से एक निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरा है।
इधर जागेश्वर सीट पर किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं बचा हुआ है। ऐसे में निर्दलीय जिले की सभी पांच सीटों पर दमदार उपस्थिति देकर दलों के समीकरणों को गड़बड़ा रहे हैं। पांच सीटों पर उतरे दस निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी गणित को कितना प्रभावित करते हैं यह तो आने वाले वक्त बताएगा।