उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने विधानसभा चुनाव स्थगित करने से किया इनकार

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक बार फिर राज्य में विधानसभा चुनाव स्थगित करने से इनकार कर दिया है। साथ ही भारत जैसे विशाल देश में चुनाव कराने को लेकर केन्द्रीय चुनाव आयोग की सराहना भी की है।

अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों को टीके की बूस्टर डोज घर में उपलब्ध कराने को कहा है।  कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति एनएस धनिक की युगलपीठ में याचिकाकर्ता सचिदानंद डबराल की ओर से पेश प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। केन्द्रीय चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश में चुनाव को लेकर आयोग की ओर से एक विस्तृत गाइड लाइन जारी की गयी हैं।

साथ ही जनसभाओं, रैली, पदयात्रा व भीड़भाड़ पर 15 जनवरी तक रोक लगा दी गयी है।  आगे परिस्थितियों व हालात की समीक्षा के बाद आयोग की ओर से  पुन: निर्णय लिया जायेगा। गाइड लाइन में चुनाव प्रचार, नामांकन व मतदान के साथ ही मतगणना के लिये अलग-अलग दिशा निर्देश जारी किये गये हैं। साथ ही ये सभी निर्देश पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

सभी राज्य निर्वाचन अधिकारियों को इनका कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश भी दिये गये हैं।  इसके बाद अदालत ने सख्ती के साथ चुनावों को स्थगित करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने जनसभाओं व रैलियों पर भी प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि आयोग की ओर से चुनाव घोषित हो गये हैं और यह सब चुनाव आयोग पर छोड़ देना चाहिए। अदालत ने आयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनाव आयोग का प्रयास सराहनीय है। 

हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग पर वरिष्ठ व अक्षम लोगों को  कोरोना टीके की बूस्टर डोज घर में ही उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये। साथ ही सरकार को सभी जिला निगरानी समितियों की पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर अगली सुनवाई तक जवाब करने को कहा है।

इस मामले की अगली सुनवाई शीतकालीन अवकाश के बाद 17 फरवरी को होगी।

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